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सैलाना में भारत आदिवासी पार्टी के कमलेश्वर हुए विजयी

रतलाम, 03 दिसंबर (वार्ता) मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में आज भारत आदिवासी पार्टी के उम्मीदवार कमलेश्वर डोडियार ने शानदार विजय हासिल करते हुए सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस, दोनों ही दलों के प्रत्याशियों को करारी शिकस्त दी। इस विजय के साथ ही सैलाना एक बार फिर से चर्चा में आ गयी।
रतलाम जिले के सैलाना विधानसभा क्षेत्र में राज्य में सबसे अधिक मतदान 90 प्रतिशत से अधिक दर्ज हुआ था। अब यहां पर भारत आदिवासी पार्टी के श्री डोडियार ने 4618 मतों से जीत दर्ज की है। इस सीट पर न सिर्फ कांग्रेस और भाजपा, बल्कि बहुजन समाज पार्टी,समाजवादी पार्टी और जनता दल (यूनाइटेड)के प्रत्याशी भी मैदान में थे। श्री डोडियार ने तमाम पूर्वानुमानों को ध्वस्त करते हुए कुल 71,219 मत प्राप्त किए। जबकि कांग्रेस प्रत्याशी हर्षविजय गेहलोत ने 66,601 मत प्राप्त किए। भाजपा प्रत्याशी संगीता चारेल को मात्र 41,584 मत प्राप्त हुए और वे तीसरे स्थान पर रहीं। संगीता चारेल 2013 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कर सैलाना की विधायक रह चुकी हैं। इसी तरह कांग्रेस प्रत्याशी हर्षविजय गेहलोत चुनाव से पहले तक सैलाना के विधायक थे।
सैलाना के नतीजे आने के बाद अब राजनीतिक विश्लेषक इस बात का आकलन करने में जुटे हैं कि वे कौन से कारण रहे जिनकी वजह से भाजपा और कांग्रेस दोनों को पराजय का मुंह देखना पड़ा। क्षेत्र की जानकारी रखने वालों के मुताबिक सैलाना में जीत दर्ज करने वाले कमलेश्वर डोडियार पिछले कई वर्षों से पूरे क्षेत्र में सक्रिय रहे हैैं। वे जयस संस्था के संस्थापक हैं और जयस को मजबूत बनाने में उनकी प्रमुख भूमिका रही है। श्री डोडियार पिछले विधानसभा चुनाव में भी निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में चुनाव लड़े थे। लेकिन वे चुनाव में अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए थे। चुनाव हारने के बावजूद श्री डोडियार की सक्रियता कम नहीं हुई और वे लगातार काम करते रहे।
उनकी राजनीतिक ताकत बढने का प्रमाण पिछले जिला पंचायत चुनाव में सामने आया था, जब सैलाना विधानसभा के चारों वार्डो में जयस के प्रत्याशियों ने जबर्दस्त जीत हासिल की थी। पिछले जिला पंचायत चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनो ही पार्टियों को सैलाना में हार का सामना करना पडा था। जिला पंचायत चुनाव के नतीजों से उत्साहित जयस के युवा कार्यकर्ताओं ने पूरे विधानसभा क्षेत्र में अपनी सक्रियता और बढा दी थी। आदिवासी युवाओं में जयस की अच्छी पकड का फायदा भी श्री डोडियार को मिला।
चुनाव के पहले कमलेश्वर डोडियार पर दुष्कर्म और गवाहों को धमकाने जैसे आरोपों में न सिर्फ आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए थे, बल्कि उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। प्रशासन की इन कार्यवाहियों के चलते आदिवासी क्षेत्रों में उन्हें सहानुभूति का भी लाभ मिला और वे पूरे प्रदेश में अकेले ऐसे विधायक चुन लिए गए, जो कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियों से अलग हैं। कमलेश्वर के चुनाव की एक खासियत यह भी थी कि उन्होंने चुनाव लडने के लिए क्षेत्र के लोगों से ही चन्दा जुटाया और बेहद कम संसाधनों से चुनाव लडा। उनके कार्यकर्ता मोटर साइकिलों से गांव गांव घूमते रहे और आखिरकार उन्होंने जीत दर्ज कर दी।
सं प्रशांत
वार्ता
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