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विजयवर्गीय की टिप्पणी को लेकर हंगामा, कांग्रेस ने किया बहिष्कार

भोपाल, 12 फरवरी (वार्ता) मध्यप्रदेश विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर पेश किए गए कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव पर चर्चा के उपरांत आज मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के जवाब के दौरान संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की महापुरुषों के अपमान से संबंधित टिप्पणी को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के सदस्यों ने हंगामा किया और उनकी बात नहीं माने जाने पर बहिष्कार किया।
डॉ यादव के जवाब के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की विभूतियों को भारत रत्न दिए जाने के संबंध में की गयी टिप्पणी को लेकर भी हंगामा हो गया और आखिरकार सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों की आपत्ति के बाद संबंधित टिप्पणियों को अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने विलोपित करने के निर्देश दिए। हालाकि डॉ यादव के जवाब के दौरान अनेक अवसरों पर टोकाटाकी भी देखी गयी और हास परिहास भी हुआ।
मुख्यमंत्री ने जवाब की शुरूआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों की काफी तारीफ की और उन्हें अभूतपूर्व नेता बताया। उन्होंने झाबुआ में एक दिन पहले श्री मोदी की सभा का संदर्भ दिया और अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण, ट्रिपल तलाक को लेकर उठाए गए कदम और अन्य कार्याें को गिनाते हुए प्रधानमंत्री की तारीफ की। श्री यादव ने पांच विभूतियों को भारत रत्न से नवाजे जाने के संदर्भ में श्री मोदी की फिर से प्रशंसा की और कहा कि अब वास्तविक हकदार को ये सम्मान दिए जाते हैं, अन्यथा पूर्व में इस तरह के कार्य नहीं होते थे।
इस टिप्पणी के बाद नेता प्रतिपक्ष श्री सिंघार ने भारत रत्न दिए जाने के संबंध में श्री मोदी का संदर्भ देते हुए एक टिप्पणी कर दी। इस पर सत्तारूढ़ दल भाजपा के सदस्य आक्रोशित हो गए और उन्होंने सख्त आपत्ति दर्ज करायी। अध्यक्ष श्री तोमर ने विवादित टिप्पणी को विलोपित करते हुए कहा कि भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक अलंकरण है और इसके बारे में ऐसा नहीं बोला जाना चाहिए। इसके बाद इस मामले का पटाक्षेप हो गया। हालाकि विपक्षी सदस्यों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री की टिप्पणी को भी विलोपित करने की मांग की।
इसके बाद डॉ यादव ने अपना जवाब जारी रखा, तभी संसदीय कार्य मंत्री श्री विजयवर्गीय ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा से महापुरुषों का अपमान किया है। उन्होंने इतिहास की पुस्तक का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने गुरू गाेविंद सिंह, शिवाजी और जनजातीय जननायक टंट्या भील का अपमान किया है। इसके बाद कांग्रेस के श्री रामनिवास रावत समेत अनेक नेताओं ने इस पर सख्त ऐतराज जताते हुए अध्यक्ष से इस टिप्पणी को विलोपित करने की मांग की। श्री रावत ने कहा कि मंत्री असत्यबयानी कर रहे हैं। इतिहास में ऐसा नहीं है। वहीं श्री विजयवर्गीय अपनी बात पर अडिग रहे और कहा कि एनसीईआरटी की किताबों में ऐसा लिखवाया गया था, जिसे बाद में हटवाया गया।
अध्यक्ष श्री तोमर ने सदस्यों से शांत होने का अनुरोध करते हुए कहा कि इस मामले में उन्होंने कांग्रेस और सत्तारूढ़ दल भाजपा के सदस्यों की बात सुनी है। वे स्वयं संबंधित किताब देखेंगे और इसके आधार पर इस संबंध में निर्णय लेंगे। लेकिन श्री रावत संंबंधित टिप्पणी को तत्काल विलोपित कराने की मांग पर अड़े रहे। कांग्रेस के अनेक सदस्यों ने उनका साथ दिया। वहीं अध्यक्ष ने अपनी पूर्व की व्यवस्था का हवाला देते हुए सभी सदस्यों से शांत रहने और मुख्यमंत्री का जवाब पूरा हो जाने के लिए कार्यवाही चलने देने का आग्रह किया। इसी बीच नेता प्रतिपक्ष और श्री रावत की घोषणा पर कांग्रेस सदस्यों ने सदन का बहिष्कार किया। श्री रावत ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री का जवाब राज्य के विषयों पर केंद्रित नहीं है। इसके बाद विपक्षी दल कांग्रेस की अनुपस्थिति में मुख्यमंत्री का जवाब पूरा हुआ।
इसके पूर्व डॉ यादव के जवाब के दौरान जब वे प्रधानमंत्री श्री मोदी की तारीफों के पुल बांध रहे थे, अनेक अवसरों पर विपक्षी सदस्यों की टिप्पणियों पर सदन ठहाकों से गूंज गया। कांग्रेस के अनेक सदस्यों ने जवाब के दौरान टोकाटाकी भी की। कांग्रेस के बाला बच्चन ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने जवाब के दौरान प्रस्ताव पर चर्चा में शामिल होने वाले सिर्फ उन सदस्यों का नाम लिया है, जिन्होंने आज ही हिस्सा लिया। जबकि चर्चा पूर्व में भी दो दिन तक हो चुकी है और उसमें उनके समेत अनेक सदस्यों ने हिस्सा लिया है। लेकिन उनका नाम मुख्यमंत्री ने नहीं लिया। तभी अध्यक्ष श्री तोमर ने कहा कि जितने भी सदस्यों ने चर्चा में हिस्सा लिया है, सबके नाम मुख्यमंत्री द्वारा लिए हुए माने जाएं। इस पर सदन में हंसी के ठहाके गूंज उठे।
इसी तरह कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य श्री रावत की टिप्पणी पर ठहाके लगाए गए। उन्होंने श्री मोदी की तारीफ के संदर्भ में सत्तारूढ़ दल के प्रथम पंक्ति में मुख्यमंत्री के पास बैठे वरिष्ठ मंत्रियों की ओर मुखातिब होते हुए कहा कि डॉ यादव का भाषण हम सब ध्यान से सुन रहे हैं, लेकिन प्रथम पंक्ति में बैठे इन नेताओं को भी इसे ध्यान से सुनना चाहिए। एक बार फिर सदन ठहाकों से गूंज गया।
मुख्यमंत्री डॉ यादव ने अपने एक घंटे से अधिक के भाषण में श्री मोदी और उनकी नीतियों का बार बार जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अभी उनकी सरकार को लगभग दो माह ही हुए हैं। भाजपा का जो भी संकल्प पत्र है, वह पांच वर्ष के लिए है। इसके बावजूद संकल्प पत्र के लगभग 40 बिंदुओं को पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा टंट्या भील के नाम पर जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना की घोषणा समेत ऐसे अनेक कार्य भी हुए हैं, जिनका संकल्प पत्र में जिक्र नहीं है। लेकिन सरकार वे सब कार्य भी करेगी, जो आज की आवश्यकता के अनुसार जरूरी हैं।
डॉ यादव ने कहा कि उनकी सरकार प्रदेश के विकास की नयी इबारत लिखेगी। इस वर्ष गुड़ी पड़वा का पर्व पूरे प्रदेश में धूमधाम से मनाया जाएगा। उन्होंने हाल में घटित हरदा कांड का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार अब आम नागरिकों को दुर्घटना की स्थिति में तत्काल इलाज मुहैया कराने के उद्देश्य से एयर एंबूलेंस की सुविधा मुहैया कराएगी। इसके अलावा राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर आने जाने के लिए आसपास के प्रमुख शहरों से “एयर सर्विस” शुरू करेगी। उन्होंने सरकार की ओर से अब तक उठाए गए कदमों के बारे में भी बताया। डॉ यादव ने विपक्ष की टोकाटाकी के बीच पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दस सालों के “कारनामों” के बारे में भी जिक्र किया।
डॉ यादव के जवाब के बाद अभिभाषण पर पेश किए गए धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इसके साथ ही विपक्षी दल के सदस्यों की ओर से पेश किए गए संशोधनों को अमान्य कर दिया गया।
डॉ यादव के जवाब के पहले नेता प्रतिपक्ष डॉ सिंघार ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए अनेक आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार ऋण लेती जा रही है। उसने संकल्प पत्र में महिलाओं को तीन हजार रुपए देने का वादा किया था। गेंहू और धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने की बात कही थी। इसके अलावा भी अनेक वादे किए गए हैं, लेकिन उनको पूरा नहीं किया गया।
प्रशांत
वार्ता
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