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शासन-संचालन में आमजन का योगदान आवश्यक: यादव

भोपाल, 15 फरवरी (वार्ता) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि शासन- संचालन में आमजन का योगदान और उनका सम्मान आवश्यक है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार डॉ. यादव आज कोमुरवेल्ली रेलवे स्टेशन के शिलान्यास समारोह में विशेष अतिथि के रूप में कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कोमुरवेल्ली प्रवास के दौरान यहां के प्रमुख आस्था केंद्र मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर में दर्शन किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भगवान मल्लिकार्जुन के द्वार पर आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम के अतिथियों और स्थानीय जन को भगवान महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आने का निमंत्रण भी दिया। उन्होंने कहा कि रेल सुविधाओं के विकास से सशक्त भारत का निर्माण हो रहा है। भारत के रेलवे का इतिहास करीब पौने दो सौ वर्ष पुराना है। आज न सिर्फ निर्धन वर्ग बल्कि समाज के सभी वर्गों के लिए रेल साधन उपयोगी हैं। मेट्रो के साथ ही वन्देभारत ट्रेनें और अन्य विशेष रेलगाड़ियां उपयोगिता बढ़ा चुकी हैं। बढ़ती रेल सुविधाओं से व्यवसाय और रोजगार के क्षेत्र में लाभ मिल रहा है। हमारे वीर सैनिक शत्रुओं से दो-दो हाथ करने के लिए देश की सीमाओं तक रेल से ही पहुंच रहे हैं। आज प्रारंभ रेल सुविधा का यह प्रकल्प क्रियान्वित होने पर स्थानीय निवासियों के लिए लाभकारी होगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी और रेल मंत्री वैष्णव के आशीर्वाद से यह महती सुविधा मिल रही है।
डॉ. यादव ने कहा कि काल के प्रवाह में यह गर्व का विषय है कि भारत विकास के साथ अपनी संस्कृति के संरक्षण की दिशा में भी आगे बढ़ा है। सरयू तट पर अयोध्या में भगवान राम के मंदिर के लिए प्राण-प्रतिष्ठा कार्य पूर्ण होने के बाद संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबूधाबी में भी मंदिर के लोकार्पण का कार्य हो गया है। आज इजराइल युद्ध हो या इसके पूर्व रूस-यूक्रेन युद्ध, सभी जगह भारत के नेतृत्व का डंका बज रहा है। कतर जैसे राष्ट्र मानते हैं कि भारत से उसकी मित्रता अमर है और वे भारतवासियों के साथ खड़े हैं। अनेक राष्ट्र आपसी संघर्ष और युद्धों के बावजूद भारतवासियों की सुरक्षा और सम्मान के लिए प्रतिबद्ध दिखाई देते हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी के प्रधानमंत्री पद के दो कार्यकाल के पूर्व का समय याद करें तो अनेक देश भारत का वह सम्मान नहीं करते थे जो आज करते हैं।
डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में जिन-जिन स्थानों पर भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के चरण पड़े हैं, उन्हें तीर्थ स्थल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया है। करीब पांच हजार वर्ष पहले कौरव- पांडव के बीच धर्म युद्ध हुआ। भगवान श्रीकृष्ण ने सत्य के लिए लड़ना सिखाया। गत 22 जनवरी को अयोध्या में राममंदिर के गर्भ गृह में प्राण-प्रतिष्ठा उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक नागरिकों की आस्था के सम्मान का प्रतीक बनी है।
नाग
वार्ता
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