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न्यायालय ने अध्यादेश मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया

नैनीताल, 16 सितम्बर (वार्ता) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सोमवार को राज्य के पांच पूर्व मुख्यमंत्रियों को राहत देने से जुड़े अध्यादेश की वैधानिकता को लेकर राज्य सरकार से तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है और महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को पक्षकार बनाया है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की युगलपीठ में सोमवार को अध्यादेश के मामले में सुनवाई करते हुये महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को पक्षकार बना और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के लिये कहा है। मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी।
याचिकाकर्ता ने न्यायालय को बताया गया कि अध्यादेश असंवैधानिक है और उच्च न्यायालय के 3 मई 2019 को पारित आदेश को पलटने के उद्देश्य से अध्यादेश को लाया गया है। न्यायालय को यह भी बताया गया कि सरकार को इस प्रकार की कोई विधायी शक्ति नहीं मिली हुयी कि वह न्यायालय के आदेश के खिलाफ कोई अध्यादेश ला सके।
देहरादून की एक गैर सरकारी संस्था रूरल लिटिगेशन एंड एनटाइटलमेंट केन्द्र (रलेक) ने न्यायालय में अध्यादेश को चुनौती देते हुये याचिका दायर की थी। इस मामले में उत्तराखंड सरकार के अलावा प्रदेश के चार पूर्व मुख्यमंत्रियों रमेश पोखरियाल निशंक, बहुगुणा और भुवन चंद्र खंडूड़ी को भी पक्षकार बनाया गया है।
उल्लेखनीय है कि रलेक की ओर से वर्ष 2010 में एक जनहित याचिका दायर कर पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिले सरकारी आवास और अन्य सुविधाओं के मामले को चुनौती दी गयी थी। इसके बाद उच्च न्यायालय ने इसी वर्ष 3 मई को दिये आदेश में सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को बाजार दर पर आवास किराया और अन्य मदों का भुगतान करने को कहा था।
सं राम
वार्ता
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