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उप्र की तरह उत्तराखंड के मंत्री स्वयं करेंगे आयकर भुगतान

अल्मोड़ा/देहरादून 23 अक्टूबर(वार्ता) उत्तराखंड मंत्रिमण्डल (कैबिनेट) ने उत्तर प्रदेश की तरह मंत्रियों के आयकर का भुगतान सरकार द्वारा न करने का निर्णय लिया है और मंत्री अब खुद अपने आयकर का भुगतान करेंगे। इसके साथ ही कैबिनेट ने 13 अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लिये हैं।
कुमायूं मण्डल के अल्मोड़ा में बुधवार को पहली बार आयोजित कैबिनेट पूरी तरह कागजविहीन (पेपरलेस) हुई। कैबिनेट ने सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के साथ राज्य की जल नीति 2019 को स्वीकृति दी। राज्य में वर्ष 2012 में निजी कंपनियों के साथ कार्य हेतु बनी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड नीति 2012 में संशोधन किया गया है।
कैबिनेट ने राज्य की औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आई.टी.आई.) में फीस वृद्धि को मंजूरी देते हुये फीस वृद्धि के फलस्वरुप मिलने वाले राजस्व का कुछ हिस्सा आई.टी.आई. एवं कुछ हिस्सा राजकोष में जमा होगा। आई.टी.आई. के स्तर को सुधारने के लिए राज्य सरकार इस राशि का उपयोग करेगी। जंगली जानवरों से जान-माल के नुकसान पर सहायता राशि अब वन विभाग के जगह आपदा कोष से मिलेगा।
सरकार ने टिहरी झील के पास भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) के एडवेंचर सेंटर को मंजूरी देते हुये इसमें जब तक भूमि उपलब्ध नहीं होती तब तक पर्यटन विभाग के भवनों का उपयोग किये जाने पर सहमति व्यक्त की है। डॉ आर. एस. टोलिया प्रशासकीय अकादमी नैनीताल की सेवा नियमावली को भी इसके साथ मंजूरी प्रदान की गई है।
एक अन्य फैसले में राज्यपाल सचिवालय और राजभवन की अब एक ही नियमावली पर सहमति दी गई है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय गृह आवास नियमावली में संशोधन कर दिया गया है। उत्तराखंड डेयरी सहकारी फेडरेशन के तहत उच्च प्राथमिक एवं प्राथमिक स्कूलों के लगभग छह लाख बच्चों को सप्ताह में एक दिन पोस्टिक दूध मिलेगा।
कैबिनेट ने पशुपालन विभाग के तहत वैक्सीनेटर सेवा नियमावली को मंजूरी देते हुये उत्तराखंड राजस्व अभिलेख 2019 का प्रख्यापन किया है। इसके लिए प्रदेश में 10 सदस्य कमेटी बनेगी और जिलों में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी बनाई जाएगी।
सं. उप्रेती
वार्ता
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