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ऋषिकेश में वन भूमि अतिक्रमण हटाने के मामले में सरकार से मांगा जवाब

नैनीताल, 02 नवम्बर (वार्ता) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने ऋषिकेश के वीरपूर खुर्द में आरक्षित वन भूमि पर प्रतिवादी मुनि चिदानंद की ओर से किये गये अतिक्रमण एवं अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई के मामले में सरकार से 24 घंटे के अंदर जवाब पेश करने को कहा है।
अदालत ने पूछा है कि सरकार शपथ पत्र पेश करके बताये कि अवैध निर्माण के खिलाफ कब तक कार्रवाई की जायेगी। अदालत सरकार से इस मामले में ठोस जवाब चाहती है। सरकार को कल तक जवाब पेश करना है और इस मामले में मंगलवार (तीन नवम्बर) को भी सुनवाई होगी।
मामले की सुनवाई आज कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमथ की अगुवाई वाली खंडपीठ में हुई। उच्च न्यायालय पहले ही इस मामले में सरकार को अतिक्रमण के खिलाफ कार्यवाही करने के निर्देश दे चुका है। याचिकाकर्ता अर्चना शुक्ला की ओर से अदालत को बताया गया कि सरकार इस मामले में कार्यवाही करने से बच रही है।
प्रतिवादी के रसूखदारों से संबंध होने के चलते वन विभाग व राजस्व विभाग द्वारा उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। याचिकाकर्ता की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि वीरपुर खुर्द गांव में मुनि चिदानंद की ओर से 35 बीघा आरक्षित वन भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। इस भूमि पर एक गौशाला, एक बड़ा हाल एवं 52 कमरों का निर्माण किया गया है। सरकार जानबूझ कर अवैध निर्माण एवं अतिक्रमण के खिलाफ कार्यवाही नहीं कर रही है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विवेक शुक्ला ने बताया कि आज अदालत ने सरकार से साफ साफ पूछा है कि अतिक्रमण के खिलाफ कब तक कार्यवाही की जायेगी। सरकार को इस बारे में कल तक शपथपत्र के माध्यम से बताना है।
रवीन्द्र, उप्रेती
वार्ता
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