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कर्नाटक में 85 करोड़ रुपये की हेराफेरी के मामले में दो सरकारी अधिकारी निलंबित

बेंगलुरु, 30 मई (वार्ता) कर्नाटक सरकार ने कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम लिमिटेड (केएमवीएसटीडीसीएल) में 85 करोड़ रुपये की हेराफेरी के आरोप में गुरुवार को इसके प्रबंध निदेशक जेजी पद्मनाभ और लेखा अधिकारी जी परशुराम को विभागीय जांच होने तक निलंबित कर दिया।
सरकारी आदेश में बताया गया है कि पांच मार्च से 23 मई के बीच अज्ञात व्यक्तियों ने निगम के बैंक खाते से बड़ी धनराशि निकाली। श्री पद्मनाभ हालांकि, 22 मई को धोखाधड़ी वाले हस्तांतरण के बारे में पता होने के बावजूद 27 मई तक सरकार को सूचित करने में विफल रहे, जिसके कारण उन्हें निलंबित कर दिया गया।
आदेश में श्री पद्मनाभ की इस बात पर आलोचना की गयी है कि जब जाली दस्तावेजों के माध्यम से 14 गुमनाम खातों में 86.62 करोड़ रुपयों का हस्तांतरण किया गया तो उन्होंने तुरंत कार्रवाई नहीं की।
इसके अलावा, श्री पद्मनाभ ने बताया कि वापस की गयी धनराशि का स्रोत बताये बिना निगम के खाते में पांच करोड़ रुपये लौटा दिये गये थे। सरकारी आदेश में बताया गया है कि श्री पद्मनाभ ने राज्य सरकार को अनधिकृत निकासी को दर्शाने वाले बैंक स्टेटमेंट जमा नहीं किये और अगर कोई कनिष्ठ अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार था, तो उसके खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई भी नहीं की।
स्थिति तब और बिगड़ गयी, जब निगम के एक अधीक्षक चंद्रशेखर ने आत्महत्या कर ली। उन्होंने प्रबंध निदेशक और एक मंत्री तथा कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कदाचार का आरोप लगाते हुए एक सुसाइड नोट छोड़ा था। अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ​​इन आरोपों की जांच कर रहा है।
केएमवीएसटीडीसीएल के महाप्रबंधक की शिकायत के आधार पर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है। नामजद अधिकारियों में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंधन निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकार ए. मणिमेखलाई, कार्यकारी निदेशक नितेश रंजन, रामसुब्रमण्यम, संजय रुद्र, पंकज द्विवेदी और एमजी रोड शाखा की मुख्य प्रबंधक सुचिशिता राउल शामिल हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के बचत खाते में जमा 187.33 करोड़ रुपये जाली दस्तावेजों का उपयोग करके धोखाधड़ी से निकाले गये। केएमवीएसटीडीसीएल के महाप्रबंधक ने बताया कि इन जाली दस्तावेजों के आधार पर 94.73 करोड़ रुपये अवैध रूप से विभिन्न खातों में स्थानांतरित किये गये। निगम का दावा है कि वरिष्ठ बैंक अधिकारियों को धोखाधड़ी की गतिविधियों के बारे में पता था और उसने उनके खिलाफ पूरी जांच एवं कानूनी कार्रवाई का आग्रह किया है।
जांच में पता चला कि गलत तरीके से निकाली गयी धनराशि हैदराबाद के एक सहकारी बैंक में स्थानांतरित की गयी और फिर आईटी फर्मों के तहत 14 खातों में स्थानांतरित कर दी गयी। इन खातों को तब से फ्रीज कर दिया गया है।
यामिनी,आशा
वार्ता
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