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किसान आंदोलन को कमजोर करने की साजिश : रिपोर्ट

चंडीगढ़, 21 अक्तूबर (वार्ता) सिंघू बॉर्डर पर धार्मिक बेअदबी व दलित मजदूर लखबीर सिंह की हत्या की घटनास्थल पर जाकर जांच कर आयी वकीलों की एक टीम की रिपोर्ट के अनुसार किसान आंदोलन को कमजोर करने व पटरी से उतारने के उद्देश्य से कुछ ताकतों द्वारा गहरी साजिश के तहत लखबीर सिंह को सिंघू बॉर्डर ले जाया गया था।
लॉयर्स फॉर ह्यूमन राईट्स इंटरनेशनल की आज यहां जारी रिपोर्ट के अनुसार पांच वकीलों नवकिरण सिंह, तेजिंदर सिंह सुडां, यदविंदर सिंह ढिल्लों, हरिंदर सिंह ईशर और परमिंदर सिंह मलोया की एक टीम प्रकरण के बारे में जानकारी जुटाने 19 अक्तूबर को सिंघू बॉर्डर पर किसान आंदोलन स्थल पर गई थी।
रिपोर्ट के निष्कर्ष व सुझाव खंड में यह भी कहा गया है कि निहंगों के मृतक, जो धार्मिक बेअदबी का आरोपी था, के प्रति बुरे सलूक को लेकर काफी शोर मचा है। जांच टीम का एकत्रित प्रमाण के आधार पर मानना है कि हालात का विश्लेषण करने के लिए निहंग सिंहों के नज़रिये सेे सोचना होगा, जो दसवें गुरू गुरू गोबिंद सिंह की सेना का हिस्सा थे और मानते हैं कि सिक्ख पंथ, गुरद्वारों व सिक्खों को शत्रुओं से बचाने के लिए सभी साधनों का इस्तेमाल उनका कर्तव्य है। रिपोर्ट के अनुसार बेअदबी की घटना गंभीर उकसावा थी और निहंग सिंहों ने गलत कार्य करने वाले (मृतक लखबीर सिंह) को सजा देने व उनसेे यह जानने के लिए कि उन्हें किसने वहां भेजा, किस इरादे से भेजा, पीटा गया और यह जानने के बाद उनके जैसे एक दर्जन और लोगों को किसान आंदोलन को पटरी से उतारने के लिए भेजा गया है, निहंगों ने संयम खो दिया व उनका हाथ काट दिया।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि मौके पर मौजूद पुलिस मूक दर्शक बनी रही व हस्तक्षेप करने या लखबीर सिंह को चिकित्सकीय सहायता मुहैया कराने की कोई कोशिश नहीं की, जिसकी जान ज्यादा रक्तस्राव होने के कारण चली गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2015 से बेअदबी की घटनाएं बढ़ी हैं और पुलिस व न्यायिक अदालतों की लंबी प्रक्रिया के कारण ऐसे माहौल बना है कि सिक्ख व्यवस्था में विश्वास खो रहे हैं।
रिपोर्ट में पंजाब सरकार से घटना के पीछे साजिश की जांच करने का सुझाव दिया है।
रिपोर्ट में हरियाणा पुलिस से मामले में अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम से संबंध आरोप हटाने का सुझाव दिया गया है चूंकि पीड़ित व आरोपी दोनों अनुसूचित जाति/जनजाति श्रेणी से हैं।
रिपोर्ट में उन राजनीतिक नेताओं की निंदा की गई है जो घटना को एक दलित के खिलाफ अत्याचार की घटना के रूप में इसे पेश कर जाति आधार पर लोगों की भावनाएं भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।
रिपोर्ट में लखबीर सिंह की जान जाने पर अफसोस व्यक्त किया गया है और परिवार (पत्नी व तीन बेटियों) को रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने व शिक्षा मुहैया कराने की सिफारिश की गई है ताकि परिवार अपने पैरों पर खड़ा हो सके।
रिपोर्ट में इसीके साथ आरोपी निहंग सिंहों को कानूनी सहायता मुहैया कराने की सिफारिश भी की गई है।
महेश विजय
वार्ता
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