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बढ़ते अपराधों के विरोध में फतेहाबाद के बाजार बंद

फतेहाबाद, 14 मार्च (वार्ता) हरियाणा के फतेहाबाद शहर में विभिन्न संगठनों ने जिले में बढ़ रहे अपराधों के विरोध में मंगलवार सुबह से दोपहर 12 बजे तक बाजार बंद रखे।
बंद से पहले सुबह नौ बजे शहर के सभी जनसंगठनों के लोग और व्यापारी अनाज मंडी शेड के नीचे एकत्र हुए तथा यहां पर उन्होंने अपनी सभी 14 मांगें लोगों को सुनाईं और कहा कि यह बंद पुलिस या प्रशासन के खिलाफ नहीं बल्कि शहर में बढ़ रही आपराधिक गतिविधियों और गुंडा तत्वों के खिलाफ हैं। संगठनों ने चेतावनी दी कि हफ्ते भर में मांगों पर अमल नहीं हुआ तो इस बंद को राज्य स्तर तक ले जा सकते हैं। इस सम्बंध में 23 मार्च को फिर से रतिया में संगठन बैठक करेंगे।
धरने के बाद काफी संख्या में लोग फिर जुलूस की शक्ल में शहर के बाजारों में निकल पड़े। जुलूस मंडी से लाल बत्ती चौक, फव्वारा चौक, थाना रोड, जवाहर चौक, शिव चौक होते हुए हाईवे, फिर चार मरला कॉलोनी, हंस मार्केट होते हुए दोबारा लाल बत्ती चौक पहुंचा। प्रशासन ने भी विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर पुलिस का पुख्ता इंतजाम किया था, लेकिन प्रदर्शनकारी लघु सचिवालय जाने के बजाय वापस लाल बत्ती चौक पहुंचे और प्रशासन तक मांग पहुंचाई कि अधिकारी यहां आकर ज्ञापन लें, जिसके बाद अतिरिक्त उपायुक्त लघु सचिवालय से लाल बत्ती तक आए और प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन लिया।
व्यापार मंडल के अध्यक्ष अशोक नारंग, उपाध्यक्ष विनोद अरोड़ा ने सभी व्यापार संघों के पदाधिकारियों का बंद सफल बनाने के लिए धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि फतेहाबाद एक छोटा शहर है और इसके अंदर स्थित बस अड्डा, नागरिक अस्पताल और थाने को बाहर निकाल देना ही फतेहाबाद के विकास को खत्म करना है, जबकि सरकार इन चीजों को नया बनाकर फतेहाबाद को विकास के रास्ते पर लेकर जाना चाहती है, जो कि उसका भ्रम है और आज वह भ्रम लोगों ने अपनी दुकानें बंद करके तोड़ दिया है।
श्री नारंग ने कहा कि फतेहाबाद का बस स्टैंड बाहर जाने से व्यापारी भाइयों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है और साथ-साथ चोरी, छीना-झपटी और लूटपाट की घटनाएं भी बढ़ी हैं, जो चिंता का विषय है। अगर इसी तरह नागरिक अस्पताल को भी शहर से बाहर कर दिया जाएगा तो इससे आम गरीब आदमी को इतनी दूर इलाज कराना असंभव हो जाएगा। इतने पैसे उसके आने जाने में वह लगाने के बजाय वह यहां किसी प्राइवेट अस्पताल मे इलाज करा सकता है। सरकार इस विषय पर नहीं सोच रही है। सरकार अगर शहर को बड़ा समझती है, जो यहां पुलिस चौकियों की संख्या बढ़ाने के बजाय सिटी थाने को शहर से बाहर कर देना कहां की समझदारी है। इससे तो पुलिस का रहा सहा डर भी असामाजिक तत्वों के मन से निकल गया है। अब तो लोगों का घरों से बाहर निकलना दूभर हो गया है।
सं.रमेश.श्रवण
वार्ता
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