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पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने संकट हल करने का योगी से किया आग्रह

जालंधर, 18 मार्च (वार्ता) पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने उत्तर प्रदेश के हड़ताली बिजली कर्मचारियों के लिए एकजुटता प्रदर्शित करते हुए संकट हल करने के लिए शनिवार को उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के प्रबंधन को निर्देशित करने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को पत्र लिखा है।
उत्तर प्रदेश के हड़ताली कर्मचारियों के समर्थन में तेलंगाना, मध्य प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन और विरोध सभाएँ आयोजित की गई हैं।
आल इंडिया पावर इंजीनियर फेडरेशन (एआईपीईएफ) के प्रवक्ता वी के गुप्ता ने कहा कि ऊर्जा निगमों के शीर्ष प्रबंधन की ‘हठ’ के कारण इंजीनियर, जूनियर इंजीनियर, तकनीशियन, ऑपरेटिंग स्टाफ, लिपिक और संविदा कर्मचारियों को 72 घंटे की हड़ताल करने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी नवंबर, 2022 से उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अनपरा और ओबरा की दो नई 800 मेगावाट उत्पादन इकाइयों और वर्तमान में यूपीपीसीएल के स्वामित्व वाली संबंधित पारेषण संपत्तियों के निजीकरण के प्रयासों के खिलाफ संघर्ष की राह पर थे। उन्होंने बताया कि तीन दिसंबर 2022 को विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के बीच उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री की उपस्थिति में बिजली संपत्तियों का निजीकरण नहीं करने के आश्वासन के साथ एक लिखित समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। बिजली निगमों का प्रबंधन अब परस्पर सहमति और हस्ताक्षरित समझौते से इनकार कर रहा है।
गुप्ता ने कहा कि जब अक्टूबर 2020 में निजीकरण के मामले में आंदोलन चल रहा था, तब सहमति बनी थी कि निजीकरण के प्रस्ताव को वापस लिया जाए। समझौते में कहा गया है कि राज्य बिजली वितरण कंपनियां मौजूदा ढांचे के भीतर बिजली आपूर्ति और परिचालन क्षमता में सुधार करने का प्रयास करेंगी और भविष्य में किसी भी निजीकरण के प्रस्ताव को कर्मचारियों और अधिकारियों को विश्वास में लेने के बाद तैयार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि उप्र पावर इंजीनियरों ने थर्मल पावर प्लांटों के संचालन में ट्रैक रिकॉर्ड बनाया है और अनपरा और ओबरा थर्मल प्लांटों में नई 800 मेगावाट की सुपर क्रिटिकल इकाइयों को बनाए रखने की अनुमति दी जानी चाहिए क्योंकि इससे बिजली की कमी को पूरा करने में भी मदद मिलेगी। हड़ताली बिजली कर्मचारी संविदा कर्मियों को नियमित करने और बिजली (संशोधन) विधेयक 2022 को रद्द करने की भी मांग कर रहे हैं।
ठाकुर.श्रवण
वार्ता
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