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आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनाएगी सरकारः अग्निहोत्री

शिमला 24 मार्च (वार्ता) हिमाचल प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान आउटसोर्स कर्मचारियों को लेकर हंगामा हो गया। सदन में उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि जल शक्ति विभाग में रखे गये आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनाना सरकार का नीतिगत मामला है।
सदस्य प्रकाश राणा ने कहा कि जो व्यक्ति आउटसोर्स पर रखे गए हैं, उन्हें तनख्वाह नहीं मिल रही। श्री रणधीर शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री महत्वपूर्ण विषय का राजनीतिक जवाब दे रहे हैं। सर्वश्री रणधीर शर्मा और और विपिन सिंह परमार द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में कही।
उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार में आउटसोर्स पर सराज और धर्मपुर विधानसभा हल्के के ज्यादातर लोग नौकरी पर रखे गए। अपने लोगों की भर्ती के लिए अलग अलग तौर तरीके अपनाए गए। उन्होंने कहा कि सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारी देने वाली कंपनियों को 38 करोड़ रुपए दिए, लेकिन कर्मचारियों को पूरा पैसा नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार जल्द पारदर्शी ढंग से 5000 आउटसोर्स कर्मचारी रखेगी। इनके लिए पॉलिसी बनाई जाएगी। उन्होंने यह बात आउटसोर्स कर्मचारियों को लेकर सदन में विधायक प्रकाश राणा, उन्होंने उपमुख्यमंत्री से जानना चाहा कि विभाग से जो आउटसोर्स कर्मचारी हटाए गए हैं उनके लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। हटाए गए कर्मचारियों के कारण पेयजल स्कीमें बंद हो गई है। गर्मियां आने वाली है।
उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों के एग्रीमेंट दिसंबर में खत्म हो गए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बात निकलेगी तो दूर तक जाएगी। एक हल्के में हजार आउटसोर्स कर्मचारी लगा दिए।
उन्होंने बताया कि जल शक्ति विभाग में 15 दिसम्बर, 2022 से 21 फरवरी, 2023 तक 559 आउटसोर्स कर्मचारियों को हटाया गया तथा किसी को भी भर्ती नहीं किया गया। प्रदेश मे जल शक्ति विभाग में आउटसोर्स पर 130 पंप ऑपरेटर, 32 पैराफिटर तथा 85 चैकीदार के पद पर कर्मचारियों को मिला कर कुल 247 कर्मचारी कार्यरत हैं। आउटसोर्स पर लाईनमैन के पद पर कोई भी कर्मचारी कार्यरत नहीं है। चूँकि, आउटसोर्स कम्पनी के साथ जल शक्ति विभाग का अनुबन्ध 31 दिसंबर को समाप्त हो चुका है इसलिए ऐसा कोई भी प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है।
सं.संजय
वार्ता
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