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हिमाचल सरकार इस साल 11068 करोड़ का कर्ज चुकाएगी

शिमला 14 मई (वार्ता) कर्ज के जाल में उलझे हिमाचल प्रदेश में अब लोन चुकाना भी एक बड़ा खर्चा है। माना जा रहा है कि हिमाचल सरकार वित्त वर्ष 2023-24 में 11068 करोड़ का कर्ज चुकाएगी। यदि सरकार सीमित ऋण लेती है और आय के साधन बढ़ाने पर जोर देती है तो भी आने वाले पांच साल के भीतर राज्य सरकार को 27,677 करोड़ रुपए का कर्ज चुकाना है। हालांकि राज्य पर 76 हजार करोड़ रुपए के करीब कर्ज है। हिमाचल की आबादी 75 लाख है।
एक अनुमान के अनुसार प्रत्येक नागरिक पर 92 हजार रुपए से अधिक का कर्ज है। हर साल बजट पेश करने के बाद यह तथ्य सामने आता है कि सरकार को लिए गए कर्ज के ब्याज की अदायगी के लिए सौ रुपए के मानक में दस रुपए खर्च करने पड़ते हैं। अमूमन राज्य सरकार एक समय में एक तिमाही में डेढ़ हजार रुपए से अढ़ाई हजार रुपए कर्ज लेती है। सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार के पहले बजट के आंकड़ों के अनुसार हिमाचल प्रदेश सरकार वित्त वर्ष 2023-24 में 11068 करोड़ का कर्ज चुकाएगी। इसमें से 5562 करोड़ रुपए तो सिर्फ लिए गए कर्ज के ब्याज की अदायगी पर खर्च होगा। कर्ज की किश्तों के रूप में 5506 करोड़ रुपए चुकाने होंगे। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में राज्य पर 87 हजार करोड़ का लोन हो जाएगा। 2024-25 तक हिमाचल का कर्ज एक लाख करोड़ को पार कर जाएगा। सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार संसाधन बढ़ाने के लिए कुछ कदम उठा रही है। इनमें से वाटर सेस अभी लीगल लड़ाई में फंसेगा।
पूर्व में प्रेम कुमार धूमल के समय जब 2012 में भाजपा सरकार ने सत्ता छोड़ी थी, तो प्रदेश पर 28760 करोड़ रुपए का कर्ज था। अब कर्ज का बोझ 76 हजार करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। सरकारी खजाने का बड़ा हिस्सा कर्मचारियों के वेतन, अन्य वित्तीय लाभ और पेंशन आदि पर खर्च हो जाता है।
हिमाचल पर वित्तीय वर्ष 2021-22 के अंत में 68 हजार 630 करोड़ का कर्ज था। तब इस कुल कर्ज में 45297 करोड़ मूल कर्ज था और 23333 करोड़ ब्याज की देनदारी थी। कैग रिपोर्ट में भी दर्ज है कि आगामी पांच साल के भीतर सरकार को 27677 करोड़ का कर्ज चुकाना है। वित्तीय वर्ष 2021-22 के कर्ज का आंकड़ा लें, तो एक साल में ही कुल लोन का दस प्रतिशत यानी 6992 करोड़ एक साल में अदा करना है। राज्य सरकार को अगले दो से पांच साल की अवधि में कुल लोन का चालीस फीसदी यानी 27677 करोड़ रुपए चुकाना है। इसके अलावा अगले पांच साल के दौरान यानी 2026-27 तक ब्याज सहित लोक ऋण की अदायगी प्रति वर्ष 6926 करोड़ होगी।
सं.संजय
वार्ता
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