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हिमाचल प्रदेश में तैयार होगी नई हरित हाइड्रोजन नीतिः सुक्खू

शिमला 20 मई (वार्ता) हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार एक नई हरित हाइड्रोजन नीति बना रही है, जिसका उद्देश्य हरित हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ावा देना और राज्य को इसके उत्पादन के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है। पर्याप्त धूप, पानी और हवा सहित नवीकरणीय ऊर्जा के प्रचुर संसाधन उपलब्ध होने से हिमाचल हरित हाइड्रोजन उत्पन्न करने के लिए एक आदर्श स्थल है।
इस नीति का प्राथमिक उद्देश्य बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश आकर्षित करना है ताकि इलेक्ट्रोलिसिस के लिए हरित विद्युत की निरंतर और टिकाऊ आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। हिमाचल प्रदेश का लक्ष्य हरित हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है। इससे न केवल जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में योगदान सुनिश्चित होगा बल्कि राज्य को सत्त विकास में भी अग्रणी बनाएगा।
उन्होंने कहा कि हरित हाइड्रोजन उत्पादन की दिशा में प्रयासों को बल देते हुए राज्य सरकार ने हाल ही ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे पायलट आधार पर हरित हाइड्रोजन और हरित अमोनिया का उत्पादन संभव होगा। इसके अलावा, सरकार युवा उद्यमियों को राज्य में निवेश के लिए सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रही है और नई हरित ऊर्जा नीति में उनकी भागीदारी को सुविधाजनक बनाने के लिए विभिन्न प्रावधान शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कंपनी ने हिमाचल प्रदेश में एक संयंत्र स्थापित करने में भी रूचि दिखाई है जो हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करेगा और इसे ई-इथेनॉल में परिवर्तित किया जाएगा। सरकार की पहल के अनुरूप इस वैकल्पिक ईंधन को सीधे पेट्रोल के विकल्प के रूप में उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के निवेश और प्रयास न केवल ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने में सहायक होंगे बल्कि राज्य में स्वच्छ मोबिलिटी के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन महत्वाकांक्षी पहलों के अलावा, एनएचपीसी (नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन) चंबा जिले में पायलट आधार पर एक ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी प्रोजेक्ट भी स्थापित कर रही है। इस परियोजना में एक समर्पित सौर संयंत्र, हाइड्रोजन उत्पादन के लिए एक इलेक्ट्रोलाइजर इकाई और एक डिस्पेंसर के साथ एक हाइड्रोजन भंडारण प्रणाली की सुविधा उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए चंबा जिले के मोहाल मोनखरी में भूमि चिन्हित की गई है। इस संयंत्र के कार्यशील होने के उपरांत, हिमाचल पथ परिवहन निगम द्वारा हाइड्रोजन चालित बसों के संचालन की योजना तैयार की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और इसे प्रोत्साहित करने से जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक प्रयासों में राज्य का महत्वपूर्ण योगदान होगा। इसके अलावा, यह स्थायी आर्थिक विकास के अवसर सृजित करेगा। इससे हिमाचल स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा पहलों के लिए एक आदर्श राज्य के रूप में उभरेगा।
सं.संजय
वार्ता
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