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सेब के साथ स्थानीय फसलों का करें समावेशः प्रो. चंदेल

शिमला, 04 नवंबर (वार्ता) कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) किन्नौर की 18वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक का आयोजन हाल ही में किया गया। बैठक की अध्यक्षता डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने की जिन्होंने इस बैठक में ऑनलाइन माध्यम से भाग लिया।
यह बैठक आगामी वर्ष में कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा की जाने वाली गतिविधियों का रोडमैप तैयार करने के लिए आयोजित की गई थी। सदस्यों को संबोधित करते हुए प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने कहा कि क्षेत्र के किसान नए ज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रति बहुत ग्रहणशील हैं। फसल गहनता और विविधीकरण के महत्व पर बोलते हुए प्रो. चंदेल ने सेब की खेती के साथ स्थानीय श्री अन्न की किस्मों का समावेश करने की आवश्यकता पर जोर दिया । उन्होंने कहा कि प्रगतिशील किसानों के खेतों में एक्सपोजर विजिट की योजना बनाई जानी चाहिए और केवीके को विभिन्न क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती के मॉडल विकसित करने चाहिए, जहां सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सके।
निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. इंद्र देव ने विश्वविद्यालय की विस्तार गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने सुझाव दिया कि केवीके की विभिन्न पहलों का प्रभाव विश्लेषण किया जाना चाहिए और सकारात्मक परिणामों को विश्वविद्यालय द्वारा जारी पैकेज ऑफ प्रैक्टिस में भी शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने समुद्र तल से 1800 से 3600 मीटर तक की ऊंचाई पर सीडलिंग रूटस्टॉक पर उच्च घनत्व वाले सेब बगीचों पर अनुसंधान परीक्षण स्थापित करने की केवीके की पहल की सराहना की। उन्होंने वैज्ञानिकों से इन परीक्षणों से नियमित रूप से वैज्ञानिक डेटा रिकॉर्ड करने का आग्रह किया।
आईसीएआर अटारी जोन-। के प्रधान वैज्ञानिक डॉ राजेश राणा ने कृषि में ड्रोन के उपयोग को प्रदर्शित करने के लिए प्रदर्शनों का सुझाव दिया। उन्होंने उन्नत कृषि उपकरणों के लिए एक कस्टम हायरिंग सेंटर का भी प्रस्ताव रखा। देश के विभिन्न केवीके के साथ क्रॉस-लर्निंग कार्यक्रम और संबंधित विभागों के साथ संयुक्त प्रयास का भी सुझाव डॉ राणा द्वारा दिया गया। केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान शिमला के डॉ. आलोक कुमार ने आलू पर अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन स्थापित करने का सुझाव दिया। सदस्यों का विचार रहा कि महिलाओं के सतत विकास और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा प्रयास किये जाने चाहिए। सभी ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवीके के विभिन्न प्रयासों की भी सराहना की।
इससे पहले केवीके समन्वयक डॉ. अशोक ठाकुर ने कृषि विज्ञान केंद्र की प्रगति रिपोर्ट और आगामी वर्ष के लिए नियोजित गतिविधियों की प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि कैसे स्टेशन ने फसल की गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार के लिए उच्च घनत्व वाले सेब प्रबंधन में कैनोपी प्रबंधन के लाभों को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया है। डॉ. ठाकुर ने यह भी बताया कि कैसे स्टेशन ने सेब मोनोकल्चर से निपटने के लिए उच्च मूल्य वाली सब्जियों के साथ अंतर फसल की शुरुआत की है। बैठक के दौरान सदस्यों ने राय दी कि कृषि को एक करियर विकल्प के रूप में बढ़ावा देने के लिए केवीके को नवीन कार्यक्रमों के साथ स्कूली बच्चों और युवाओं तक पहुंचने का प्रयास करना चाहिए। लाइन विभागों के अधिकारियों ने विस्तार कर्मियों की क्षमता निर्माण में केवीके का समर्थन मांगा।
इस बैठक में उप निदेशक बागवानी डॉ. प्रमोद शाह, पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. अजय नेगी, जिला कृषि अधिकारी डॉ. ओपी बंसल, प्रबंधक पीएनबी गौरव शर्मा, प्रगतिशील किसान- चांगो से तंजिन नेगी; चगांव से कांता देवी, स्पिलो से सरिता नेगी, निचार से मनोज, विभिन्न विभागों के अधिकारियों सहित केवीके के वैज्ञानिकों ने भी भाग लिया।
सं.संजय
वार्ता
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