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हिमाचल की तीन महिलाएं हरियाणा में उड़ा रहीं ड्रोन

शिमला, 19 नवंबर (वार्ता) हिमाचल प्रदेश की तीन महिलाएं हरियाणा के मानेसर में ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण ले रही हैं। यह प्रशिक्षण 16 से 30 नवंबर तक होगा। प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद दिसंबर माह की शुरुआत से प्रदेश में ड्रोन की खेप भी जारी होगी। इससे महिलाएं खेतों व बगीचों में कीटनाशक व खाद का ड्रोन से छिड़काव करेंगी। जानकारी के अनुसार इफको की ओर संचालित ड्रोन उड़ाने के प्रशिक्षण में चयनित महिलाओं में दो मंडी जिला की रहने वाली हैं।
हिमाचल के राज्य विपणन प्रबंधक, इफको भुवनेश पठानिया ने बताया कि चयनित लोगों में सबसे पहले तीन महिलाओं को ट्रेनिंग के लिए भेजा गया है। इसके बाद दिसंबर में अन्य उम्मीदवारों का प्रशिक्षण भी होगा। प्रशिक्षण पाने वालों को क्रमवार तरीके से ड्रोन और इलेक्ट्रिक वाहन दिए जाएंगे। कृषि और बागवानी में इस मुहिम के शानदार परिणाम सामने आएंगे।
इनमें एक महिला करसोग की रहने वाली जीनत व दूसरी बल्ह घाटी की आरती हैं। सिरमौर जिला के पांवटा साहिब की माजरा सोसाइटी में निवासी परमजीत कौर भी इस प्रशिक्षण में हिस्सा ले रही हैं। इन तीन महिलाओं को हरियाणा के मानेसर में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिसे पूरा करने के बाद सभी महिलाओं को दिसंबर माह में ड्रोन भी दिए जाएंगे, जिसके लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। इसके साथ एक इलेक्ट्रिक वाहन (थ्री व्हीलर) भी जारी किया जाएगा, जिसका इस्तेमाल ड्रोन को एक से दूसरे स्थान पर सुगम तरीके से लेकर जाने में होगा।
इलेक्ट्रिक वाहन की खेप प्रदेश में ड्रोन से पहले जारी होगी। जिला ऊना में प्रदेश का पहला इलेक्ट्रिक वाहन चरूड़ू गांव से चयनित उम्मीदवार के लिए जारी होगा। इसके बाद ट्रेनिंग लेने वाले सभी लोगों को इस वाहन को दिया जाएगा। 20 नवंबर को पहला इलेक्ट्रिक वाहन चरूड़ू पहुंचेगा। हालांकि चरुड़ू के चयनित व्यक्ति को अभी ड्रोन का प्रशिक्षण मिलना बाकी है। लेकिन उसके लिए ड्रोन व इलेक्ट्रिक वाहन की बुकिंग पहले की है। जबकि ड्रोन उड़ाने के लिए महिलाओं की भागीदारी का फैसला बाद में लिया गया।
दिसंबर माह से पुरुषों का प्रशिक्षण भी आरंभ हो जाएगा। ध्यान रहे कि इफको ने तरल नैनो खाद व कीटनाशकों के छिड़काव को सुगम करने व नैनो यूरिया व डीएपी को बढ़ावा देने के लिए ड्रोन को बाजार में उतारा है। खेतों पर ड्रोन उड़ाने वाले लोग किसानों से 25 से 30 रुपये प्रति कनाल का शुल्क लेंगे। ड्रोन की मदद से 15 मिनट में 10 कनाल भूमि पर छिड़काव करना संभव होगा। इससे किसानों पर आर्थिक बोझ भी घटेगा और समय की बचत भी होगी।
सं.संजय
वार्ता
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