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महिला सशक्तिकरण के लिए समाज में बदलाव लाने की आवश्यकताः शुक्ल

शिमला, 19 नवंबर (वार्ता) हिमाचल के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए समाज में परिवर्तन लाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि उन्हें समाज में उचित एवं समान अवसर प्रदान करने होंगे, ताकि वे अपनी पूरी क्षमता से आगे बढ़ सकें।
राज्यपाल रविवार को यहां सुनील उपाध्याय की पुण्यतिथि के अवसर पर सुनील उपाध्याय एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा ‘महिला सशक्तिकरण-भारतीय परिप्रेक्ष्य’ विषय पर आयोजित सेमिनार को संबोधित कर रहे थे।
श्री शुक्ल ने कहा कि महिला सशक्तिकरण एक ऐसा विषय है जिस पर आज समाज और राष्ट्र को चर्चा करने और उचित ढंग से क्रियान्वित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में महिलाओं को विशेष सम्मान प्राप्त था जो मध्यकाल में कम होने लगा। हालांकि आधुनिक युग में कई भारतीय महिलाएं महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक पदों पर आसीन हैं, लेकिन आम ग्रामीण महिलाएं अभी भी अपने घरों तक सीमित रहने के लिए मजबूर हैं।
राज्यपाल ने कहा कि भारत में ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं की तुलना में शहरी क्षेत्रों की अधिक महिलाएं कामकाजी हैं। आंकड़ों के मुताबिक भारतीय शहरों में लगभग 30 प्रतिशत महिलाएं सॉफ्टवेयर उद्योग में काम करती हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में लगभग 90 प्रतिशत महिलाएं मुख्य रूप से कृषि और संबंधित क्षेत्रों में दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करती हैं। उन्होंने कहा कि हमारा देश तेजी से प्रगति कर रहा है, लेकिन हम इस गति को तभी बनाए रख सकते हैं, अगर हम लैंगिक असमानता को दूर कर सकें और महिलाओं के लिए पुरुषों के समान शिक्षा, पदोन्नति और वेतन सुनिश्चित कर सकें।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार द्वारा लैंगिक असमानता और महिलाओं के विरूद्ध कुप्रथाओं को दूर करने के लिए कई संवैधानिक और कानूनी अधिकार बनाए और लागू किए गए हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
राज्यपाल ने कहा कि भारत सरकार ने महिला सशक्तिकरण के लिए कई अन्य योजनाएं संचालित की हैं इनमें से कुछ प्रमुख योजनाएं मनरेगा, सर्वशिक्षा अभियान, जननी सुरक्षा योजना (मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए संचालित योजना) आदि हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले कई वर्षों में केंद्र सरकार ने महिलाओं को दी जाने वाली सुविधाओं, सुरक्षा और सम्मान में वृद्धि की गई है। निःशुल्क गैस कनेक्शन के लिए उज्ज्वला योजना, महिलाओं के लिए स्वच्छ शौचालय और घरों में नल से जल के लिए जल-जीवन मिशन जैसी योजनाएं संचालित की गई हैं जिनसे महिलाओं का जीवन सरल बना है और उनमें आत्म-सम्मान के साथ-साथ आत्मविश्वास की भावना भी बढ़ी हैं।
इस अवसर पर राज्यपाल ने समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित भी किया।
इस मौके पर विशिष्ट अतिथि मोनिका अरोड़ा ने भी अपने विचार व्यक्त किये। इससे पहले, सुनील उपाध्याय एजुकेशन ट्रस्ट के उपाध्यक्ष अशोक शर्मा और सचिव प्रोफेसर सुरेंद्र शर्मा ने राज्यपाल का स्वागत किया।
सं.संजय
वार्ता
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