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जेएन-वन संभवतः महामारी विकास में एक नये अध्याय का प्रतिनिधित्व करता है: विशेषज्ञ

जालंधर 06 फरवरी (वार्ता) महामारी विशेषज्ञ डॉ नरेश पुरोहित ने मंगलवार को कहा कि अल्फा, डेल्टा और ओमिक्रॉन जैसे कोविड के प्रमुख वेरिएंट के बाद, जेएन-वन संभवतः महामारी के विकास में एक नये अध्याय का प्रतिनिधित्व करता है।
डॉ पुरोहित के अनुसार, जेएन-वन ने ‘एक नए युग’ की शुरुआत की है। अत्यधिक संक्रमणीय वैरिएंट वंश बनने की राह पर है, जहां से निकट भविष्य में अधिकांश वैरिएंट उत्पन्न हुये हैं।
फरीदकोट स्थित बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज द्वारा आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम ‘कोविड वेरिएंट का भविष्य’ पर अपनी वैज्ञानिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद यूनीवार्ता से बात करते हुये, सलाहकार-राष्ट्रीय संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम - पुरोहित ने कहा कि कोविड वायरस की अगली उप-वंशावली जेएन-वन से आ सकती है, ‘लेकिन हम कुछ अलग भी देख सकते हैं। हम ओमिक्रॉन जैसा कुछ फिर से देख सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि तेजी से फैलने के कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा जेएन-वन को वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट (वीओआई) के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जो वर्तमान में लगभग 41 देशों में मौजूद है। इसका पहली बार अगस्त में लक्ज़मबर्ग में पता चला था। विश्व स्वास्थ्य संगठन को उम्मीद है कि जेएन-वन से कई देशों में श्वसन संक्रमण का बोझ बढ़ जायेगा।
डब्ल्यूएचओ ने जेएन-वन को वीओआई (रुचि का प्रकार) कहा है, और इस संस्करण ने विकास में जो लाभ दिखाया है, ''यह बिल्कुल असाधारण है।''
उन्होंने बताया कि जेएन-वन बीए 2.86 का वंशज है, जिसका सबसे पहला नमूना 25
अगस्त 2023 को एकत्र किया गया था। बीए 2.86 की तुलना में, जेएन-वन में स्पाइक प्रोटीन में अतिरिक्त एल455एस उत्परिवर्तन है, जो इसे अधिक संक्रामक बनाता है। उन्होंने बताया, ‘जेएन-वन वायरस के बहुत गंभीर विकास का प्रतिनिधित्व करता है और यह खत्म नहीं हुआ है।’
उन्होंने खुलासा किया, जेएन-वन एक बिल्कुल नया संस्करण है जिसमें पहले कभी भी आम तौर पर प्रसारित होने वाले किसी भी वंश में कई बदलाव नहीं देखे गये हैं। यह अन्य हालिया वेरिएंट के विपरीत है, जो अपने पूर्ववर्ती से केवल कुछ उत्परिवर्तन थे।’ इसलिये, इस प्रकार की प्रतिरक्षा टालमटोल और प्रसार क्षमता से रोग के पैटर्न पर सावधानीपूर्वक ध्यान देने की आवश्यकता है।
ठाकुर.श्रवण
वार्ता
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