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हिमाचल में घाटा कम दर्शाने को राजस्व बढ़ा-चढ़ाकर दिखाईं प्राप्तियांः ठाकुर

शिमला, 19 फ़रवरी (वार्ता) हिमाचल प्रदेश विधानसभा बजट सत्र के पांचवें दिन की कार्यवाही दोपहर 2ः00 बजे शुरू हुई। आज कई विषयों पर चर्चा हुई।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि अपने नाम से योजनाओं के नाम रखने में मुख्यमंत्री को आनंद आ रहा है। योजनाओं के नाम तो रखो, मगर सुख की अनुभूति भी तो हो, जो नहीं हो रही है। सुख तो सिर्फ मित्रों को ही मिल रहा है। सरकार के मंत्री ही कह रहे हैं कि बजट अधूरा है। कई विभागों की अनदेखी की गई है। मुख्यमंत्री को इसे लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। हमारी सरकार ने हिमाचल में उद्योग लाए, अब उद्योग पलायन कर रहे हैं। उद्योग सस्ती बिजली के लिए हिमाचल आते थे, अब पड़ोसी राज्यों में सस्ती बिजली मिल रही है।
श्री ठाकुर ने कहा कि ग्रीन कॉरिडोर को हम दूरबीन से ढूंढ रहे हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री अगर प्रधानमंत्री से मिलते तो सलाह भी मिलती और मदद भी। कहा गया कि हेली टैक्सी चलाएंगे। जो चल रही थी, वह भी बंद हो गई। धर्मशाला को पर्यटन राजधानी बनाने की बात की पर बजट में इसका जिक्र नहीं। पिछली सरकार ने डॉक्टरों के 500 पद निकाले थे। एक साल बीत गया, एक डॉक्टर भी सरकारी नौकरी में नहीं पहुंचा। एनपीए भी बंद कर दिया है। लोन लेकर बच्चे पढ़े हैं, मगर आज दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। पैट स्कैन की सुविधा छह मेडिकल कॉलेजों में शुरू करने की घोषणा की, लेकिन एक में भी शुरू नहीं हुई। निगम कर्मियों को भी ओपीएस देने की बात की थी, मगर नहीं दी। ओपीएस के लिए केंद्र से 9,000 करोड़ रुपये लेने की बात कर रहे हैं। जो कर्मचारी सेवानिवृत्त होगा, यह पैसा उसका है। सरकार अपने खाते में जमा करने को कह रही है।
बजट पर चर्चा के दौरान श्री ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से घाटा कम दर्शाने के लिए राजस्व प्राप्तियों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है, जबकि सच्चाई पेश की जानी चाहिए थी। पिछले एक साल से विकास कार्य ठप हैं, कहीं थोड़े-बहुत चले हैं तो वह भी ठप हो जाएंगे। कर्मचारियों व पेंशनरों की देनदारियों की बात करें तो कर्मचारियों का एरियर ही 10 हजार करोड़ रुपये है। इसे बजट में छिपा दिया है। कांग्रेस ने जो गारंटियां दी हैं, बजट दस्तावेज में उनका जिक्र नहीं है। चीजों को छिपाकर प्रदेश का भला होने वाला नहीं है। सरकार ने ऋण लेने की स्पीड ऐसे बढ़ाई है, जैसे गाड़ी फोरलेन पर चलती है। जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पहले बजट में आत्मनिर्भर हिमाचल बनाने की बात कही थी। प्रदेश तो हो नहीं रहा, मुख्यमंत्री मित्रों को ही आत्म निर्भर बनाने में लगे हैं।
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि प्रदेश में भूमिहीनों को भवन बनाने के लिए जमीन देना वहीं संभव है, जहां भूमि एफसीए से बाहर हो। सरकाघाट में एफसीए के मामले अधिक हैं। यहां एफआरए में भूमि दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि आपदा एक्ट में भी भूमिहीनों को राहत देने का समाधान तलाशा जा रहा है। प्रश्नकाल के दौरान सरकाघाट से भाजपा विधायक दलीप ठाकुर ने कहा कि उनके क्षेत्र में आपदा में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। भूमिहीन लोगों को भवन निर्माण के लिए भूमि भी नहीं दी जा रही। क्षेत्र की सड़कें जो आपदा के समय में बंद थीं, उनमें बसें अभी भी नहीं चल पा रही हैं। जवाब में राजस्व मंत्री ने कहा कि 12 करोड़ रुपये से ज्यादा राशि जारी कर दी गई है। 90 फीसदी खर्च भी कर दी गई है। लोगों को लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत देखा जा रहा है, जहां पर जमीन नहीं है तो इस एक्ट का लाभ कैसे उठा सकते हैं। सभी विभागों को बजट दिया गया है। लोक निर्माण विभाग को कहा जाएगा कि वहां पर कोई समाधान निकाला जाए।
सरकाघाट के भारतीय जनता पार्टी के विधायक दलीप ठाकुर ने कहा कि उनके क्षेत्र में आपदा में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। जो धनराशि जारी की गई है, उसके बारे में सूचना भी मांगी गई थी। बहुत सारे लोग अनुसूचित जाति के भी हैं। यह निश्चित ही नहीं किया गया कि कब जमीन देने वाले हैं। जिस व्यक्ति के पास जमीन ही नहीं है, वह कहां मकान बनाएगा। उनके क्षेत्र की सड़कें जो आपदा के समय में बंद थीं, उनमें बसें नहीं चल पा रही हैं। लोगों को जमीन दिलाने के प्रयास किए जाएं।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू सदन में नहीं थे तो सप्ताह की कार्यसूची की जानकारी संसदीय कार्यमंत्री हर्षवर्द्धन चौहान ने दी। उन्होंने मुख्यमंत्री से संबंधित अन्य सभी दस्तावेजों को भी सदन के पटल पर रखा।
भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने सरकार कि आयुर्वेद के छात्र एक जैसे टेस्ट लेने के बाद जब पढ़ाई करने जाते हैं तो उन्हें इंटर्नशिप के दौरान स्टाइपेंड नहीं दिया जाता है। जो भेदभाव हुआ है, क्या सरकार इस बारे में विचार कर रही है। आयुष मंत्री यादविंद्र गोमा ने कहा कि निजी संस्थान अपने स्तर पर स्टाइपेंड देना चाहे तो दे सकते हैं। विपिन सिंह परमार ने कहा कि विषय वजीफे को लेकर नहीं है। यह आयुष मंत्री है। यह प्रस्तावना उन्होंने शुरू की है। पपरोला कॉलेज को क्लब करने की बात है। वर्तमान सरकार कहां तक इस विषय में सफल हो पाई है। आयुष मंत्री गोमा ने कहा कि जब पिछली सरकार के वक्त में प्रस्ताव केंद्र सरकार को गया था तो उस वक्त भी मामला उठाया गया था। अभी तक केंद्र सरकार ने कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया है। जहां तक रिक्तियों की बात है पूरे प्रदेश में सीटें आ चुकी हैं। इन्हें भरने का काम करेंगे।
शाहपुर के कांग्रेस विधायक केवल सिंह पठानिया ने अनुपूरक प्रश्न किया। इस पर उद्योग मंत्री हर्षवर्द्धन चौहान ने कहा कि शराब पर मिल्क सेस 10 रुपये प्रति बोतल लगाया है। 90 करोड़ रुपये एकत्र कर दिए गए हैं। इस वित्त वर्ष के अंत तक 100 करोड़ रुपये इकट्ठा कर दिए जाएंगे। पिछले चार वर्षों में शराब के ठेकों की नीलामी होती थी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शराब के ठेके नीलाम करने के बाद आबकारी से राजस्व प्राप्तियों में 40 फीसदी वृद्धि हुई है।
भाजपा विधायक बलवीर सिंह वर्मा ने प्रश्न किया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 79 योजनाएं स्वीकृत की गई हैं। उन्होंने कहा कि मृदा संरक्षण प्रभाग को इन योजनाओं को डालने के बजाय इन्हें जल शक्ति विभाग को दिया जाना चाहिए। इन्हें तकनीकी तौर पर लागू किया जाए।
इस पर कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि जल शक्ति विभाग के पास बड़ी योजनाएं ही रहती हैं। जलशक्ति विभाग के नतीजे खुद अच्छे नहीं आ रहे हैं। यह विभाग खुद उनके पास रहा है।
सं.संजय
वार्ता
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