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हिमाचल विस में बल्क ड्रग पार्क पर सदन में हंगामा, विपक्ष का बर्हिगमन

शिमला, 21 फरवरी (वार्ता) हिमाचल प्रदेश विधानसभा में विपक्ष ने बुधवार को बजट सत्र की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। वहीं सदन के भीतर भी विपक्ष ने अपने तल्ख तेवर दिखाते हुए प्रश्नकाल के दौरान बल्क ड्रग पार्क के निर्माण में हो रही देरी को लेकर हमला बोला।
भारतीय जनता पार्टी के विधायक व पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर ने सदन में बल्क ड्रग पार्क के निर्माण को लेकर प्रश्न पूछा था जिसका संतोषजनक जवाब न मिलने पर विपक्ष ने सदन में हंगामा किया और सदन से बर्हिगमन किया।
नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि बल्क ड्रग पार्क के निर्माण कार्य को सरकार जानबूझकर लटकाने का काम कर रही है, जबकि पूर्व सरकार की कड़ी मेहनत के बाद प्रदेश को बल्क ड्रग पार्क की सौगात मिली है। प्रोजेक्ट के निर्माण से प्रदेश की इकोनॉमिक स्थिति में बदलाव होगा और बेरोजगारों को रोजगार भी मिलेगा। सरकार प्रोजेक्ट के काम को रोकने का प्रयास कर रही है जो सहनीय नहीं है।
प्रश्न के जवाब में हालांकि, उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि प्रोजेक्ट में पारदर्शिता से काम हो रहा है और भारत सरकार की गाइडलाइन से काम चल रहा है। मुख्यमंत्री ने भी कहा कि प्रोजेक्ट को बंद करने की सरकार की कोई मंशा नहीं है लेकिन प्रोजेक्ट के काम में समय लगेगा। प्रोजेक्ट को हिमाचल की शर्तों के अनुरूप आगे ले जाया जाएगा। जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन में नारेबाजी कर सदन से बर्हिगमन किया।
वहीं जयराम ठाकुर ने कहा कि नौकरियों को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बीते कल सदन में झूठ बोला था, जिसको लेकर आज सदन में कांग्रेस का मेनिफेस्टो रखा गया। मेनिफेस्टो में साफ लिखा गया था कि सरकार बनने पर कांग्रेस पहली ही कैबिनेट मीटिंग में एक लाख सरकारी नौकरी देगी और पांच साल में पांच लाख रोजगार दिए जाएंगे। लेकिन अब मुख्यमंत्री सदन में झूठ बोल रहे हैं कि कांग्रेस ने ऐसा कहीं नहीं बोला है। मेनिफेस्टो अलग है और दस गारंटी अलग है। कांग्रेस ने झूठी गारंटी देकर सत्ता हासिल की और अब झूठ के सहारे सरकार चला रहे हैं लेकिन जनता अब गुमराह होने वाली नहीं है विपक्ष जनता की आवाज को बुलंद कर रहा है।
श्री सुक्खू ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश में बल्क ड्रग फार्मा पार्क और मेडिकल डिवाइस पार्क सरकार अपनी शर्तों पर ही बनाएगी। उन्होंने यह आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने हिमाचल प्रदेश के हितों को बेचने का काम किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों पार्कों के लिए जमीन एक रुपये की लीज पर दी गई। पानी और बिजली भी बहुत ही सस्ती दरों पर राज्य सरकार को ही मुहैया करवाना है। उन्होंने कहा कि दोनों ही पार्क बसेंगे, लेकिन इन्हें बसाने के लिए राज्य सरकार की अपनी शर्तें होंगी। इनके लिए अच्छी कंपनियों को लाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें हिमाचल के हित देखने हैं। किसी भी पार्क को बंद करने की सरकार की कोई मंशा नहीं है। इससे पहले इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी नोकझोंक होती रही।
इस पर मंत्री चौहान बोले कि बाहरी काम तो राज्य सरकार ने करना है। चाहे पानी है या बिजली है, यह प्रदेश सरकार को करना है। कार्यकारी एजेंसी को इसका बजट भी दे दिया गया है। इस परियोजना में जो भी करना है, वह तुरंत करना है। पार्क गुजरात और आंध्र प्रदेश को भी मिला है। इसमें स्पर्धा है। प्रदेश के कच्चे माल को लाना भी बहुत मुश्किल है। अगर चीन या अन्य देशों से सामग्री आएगी तो 50 ट्रक तो सॉलिड बेस्ड के होंगे। यह बहुत ही तकनीकी काम है। उम्मीद है कि उनकी मुख्यमंत्री से भी चर्चा हुई है। इस पर मंत्रिमंडल ही निर्णय लेगा।
इस पर श्री जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के इतिहास में पहली बार यह प्रोजेक्ट मिला है। कोविड के हालात में प्रधानमंत्री ने निर्णय लिया है कि कैसे अपने पांव पर खड़े हों। तीन बल्क ड्रग्स फार्मा पार्क बनाने की बात हुई। हिमाचल जैसे छोटे राज्य को यह परियोजना ऐसे नहीं मिली है। इसके लिए अधिकारियों ने दिन-रात मेहनत की है। डेढ़ साल बाद भी सरकार यह तय नहीं कर पा रही कि यह राज्य सरकार को करना है किसी और को करना है। इसमें 20 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार भी मिलना है। सीएम ने कहा कि मेडिकल डिवाइस पार्क में 400 एकड़ जमीन एक रुपये पर जमीन दी गई। मुफ्त में पानी देना है। तीन रुपये यूनिट पर बिजली भी देनी है। भारत सरकार ने इसे विकसित पर केवल 100 करोड़ रुपये देने हैं।
उद्योग मंत्री ने कहा मेडिकल डिवाइस पार्क को अपनी शर्त पर विकसित करेंगे, जिसमें हिमाचल के हित होंगे। हरोली में 1400 एकड़ जमीन एक रुपये की लीज पर दी जानी है। इसमें भारत सरकार ने 1000 करोड़ देने हैं। डीपीआर बनेगी तो 923 करोड़ रुपये हिमाचल सरकार देगी। सात रुपये प्रति यूनिट बिजली खरीदी जा रही है। इसे तीन रुपये प्रति यूनिट देना है। दस साल तक जीएसटी की बात छोड़ दें। इस पर सदन में नारेबाजी शुरू हुई जिसके कारण सदन में हंगामे का माहौल रहा।
सं.संजय
वार्ता
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