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शादी से पहले थैलेसीमिया की जांच करानी चाहिये: डॉ नारंगी

अमृतसर, 10 मई (वार्ता) विश्व थैलेसीमिया दिवस के अवसर पर शनिवार को श्री गुरु राम दास चैरिटेबल अस्पताल के बाल रोग विभाग ने एसजीआरडी थैलेसीमिया वेलफेयर सोसाइटी और रोटरी क्लब अमृतसर प्रीमियर के साथ मिलकर अमृतसर में दो प्रतिष्ठित स्थानों पर आठ से 11 मई तक एक रक्तदान शिविर का आयोजन किया।
डॉ. श्रुति कक्कड़, एसोसिएट प्रोफेसर डीएमसी, एसजीआरडी में बाल चिकित्सा हेमेटोलॉजिस्ट ने बताया कि सात और आठ मई को पहला रक्तदान अभियान सिख धर्म के सबसे पवित्र मंदिर, प्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर में हुआ था।
उन्होंने कहा कि नौ से 11 मई तक दूसरा रक्त अभियान श्री गुरु राम दास चैरिटेबल अस्पताल, मेहता रोड, श्री अमृतसर में आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि इन रक्त अभियानों के आयोजन से अस्पताल और कल्याण समाज को थैलेसीमिया, एक खतरनाक रक्त विकार के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद मिली, साथ ही उपचार के लिए बहुत आवश्यक रक्त दान भी एकत्र किया गया। उन्होंने कहा कि रक्त शिविर इस जानलेवा बीमारी से प्रभावित लोगों के इलाज और देखभाल में सुधार के लिये एक सहयोगात्मक सामुदायिक प्रयास का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इस अवसर पर एसजीआरडी चैरिटेबल अस्पताल के बाल रोग विभाग के प्रोफेसर और प्रमुख डॉ गुरशरण सिंह नारंग ने शादी से पहले थैलेसीमिया के परीक्षण के महत्व और थैलेसीमिया लक्षण वाले माता-पिता के साथ विवाह से बचने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया मेजर जैसी गंभीर बीमारी 25 प्रतिशत बच्चों में होती है, वास्तव में ऐसा नहीं होना चाहिये और समाज में जागरूकता के कारण बच्चों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि लड़कियों और लड़कों को शादी से पहले एक साधारण रक्त नमूने में थैलेसीमिया (हीमोग्लोबिन ए 2) के लिये परीक्षण किया जाना चाहिये और यदि वे सकारात्मक पाये जाते हैं, तो उन्हें ऐसे व्यक्ति से शादी नहीं करनी चाहिए जिसमें थैलेसीमिया लक्षण भी हो। इस प्रकार, थैलेसीमिया प्रमुख बीमारी के साथ पैदा होने वाले बच्चे पैदा नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि यदि माता-पिता दोनों में लक्षण हों और गर्भधारण हो, तो गर्भधारण के लगभग 10 सप्ताह बाद भ्रूण का परीक्षण किया जाना चाहिये और बीमारी का पता लगाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में गर्भावस्था का चिकित्सीय समापन उचित है।
ठाकुर.श्रवण
वार्ता
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