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पीएसपीसीएल पेंशनभोगी पंजाब सरकार के खिलाफ एकजुट

जालंधर 16 मई (वार्ता) पंजाब सिविल सचिवालय ऑफिसर्स रिटायर एसोसिएशन के अध्यक्ष श्याम लाल शर्मा ने गुरुवार को कहा कि पंजाब सरकार और पंजाब राज पावर कार्पोंशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) के पेंशनभोगी और उनके परिवार चुपचाप सरकार के खिलाफ हथियार उठा रहे हैं और आगामी लोकसभा चुनावों में इसके खिलाफ मतदान कर सकते हैं।
श्री शर्मा ने कहा कि पंजाब सरकार नियमों के अनुसार पेंशन के उचित निर्धारण को लेकर पेंशनभोगियों की समस्यायें नहीं सुन रही है और ऐसे में पेंशनभोगी वर्तमान सरकार के खिलाफ मतदान कर सकते हैं। यहां तक कि छठे वेतन आयोग के संबंध में सितंबर 2021 की अधिसूचना के अनुसार देय बकाया भी नहीं दिया जा रहा है। यह राशि लाखों रुपये में है।
वित्त विभाग, पंजाब ने काल्पनिक पेंशन को अंतिम आहरित वेतन के साथ जोड़ने के लिये सहमति तालिका जारी नहीं की है, बल्कि अंतिम रैंक में अर्जित वार्षिक वेतन वृद्धि के साथ पेंशन को प्राथमिकता दी है, जिसमें एक व्यक्ति सेवानिवृत्त हुआ है।
परिपत्र संख्या 19/2021 की धारा 5.1(ए) में कहा गया है कि सरकारी कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने के पद के वेतन बैंड और ग्रेड वेतन का उपयोग वेतन मैट्रिक्स में संबंधित स्तर निर्धारित करने के लिये किया जाना है। इस खंड के कार्यान्वयन ने अंतहीन विसंगतियां पैदा कर दी हैं, जिससे कनिष्ठ वेतनमान और रैंक में सेवानिवृत्त होने वालों को वरिष्ठ रैंक पर सेवानिवृत्त होने वालों की तुलना में अधिक पेंशन दी जाती है। यह इस तथ्य के कारण है कि वित्त विभाग ने केंद्र सरकार, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और भारत भर के अन्य राज्यों की तरह सहमति तालिका जारी नहीं की है।
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता (सेवानिवृत्त) बी एन पुजारा की मूल पेंशन उनके इसी विभाग के कनिष्ठ कार्यपालक अभियंता मदन लाल से 14 हजार रुपये कम तय की गयी है, दर्शन सिंह मुख्य अभियंता सिंचाई को कनिष्ठों से भी कम मूल पेंशन निर्धारित की गयी है।
सेवानिवृत्त अतिरिक्त अधीक्षण अभियंता राज कुमार गर्ग ने कहा कि पीएसपीसीएल में स्थिति और भी बदतर है, जहां पूर्वोक्त खंड 5.1 (ए) की व्याख्या और भी अधिक नकारात्मक रूप से की जा रही है और पेंशनभोगियों को पंजाब सरकार में उनके समकक्षों की तुलना में निचले स्तर पर भी तय किया जा रहा है और इस मुद्दे को संबोधित करने के लिए कोई प्रणाली नहीं है।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने 20 मार्च 2024 के अपने फैसले में केन्द्र सरकार को निर्देश दिया है कि 2006 से पहले के पेंशनभोगियों की पेंशन 2006 के बाद के पेंशनभोगियों के बराबर तय की जायेगी। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक पेंशनभोगी को परेशान करने के लिये दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) पर आठ लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
ठाकुर.श्रवण
वार्ता
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