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सुक्खू की याददाश्त कमजोर, मेडिकल कॉलेज पर गली-गली बोल रहे झूठः ठाकुर

सुजानपुर/धर्मपुर, 23 मई (वार्ता) केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने गुरुवार को कहा है कि सर्वविदित है कि हमीरपुर मेडिकल कॉलेज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की देन है। मगर या तो मुख्यमंत्री सुक्खू की याददाश्त कमजोर है या उन्हें भाजपा के किए कामों की क्रेडिट लेने की बीमारी लग गई है। श्री सुक्खू गली-गली घूम कर मेडिकल कॉलेज पर सिर्फ़ झूठ बोल कर सिर्फ़ अपने अपरिपक्व राजनीति का परिचय दे रहे हैं।
श्री ठाकुर ने कहा कि 16 महीनों के शासन में मुख्यमंत्री सुक्खू जनता के लिए कुछ नहीं कर पाए, अपनी एक भी गारंटी पूरी नहीं कर पाए तो अब चुनाव के समय जन आक्रोश से बचने के लिए भाजपा के कार्यों को अपना बताकर बेचना चाह रहे हैं। अच्छा होगा अगर मुख्यमंत्री दूसरे के काम चुराने से ज्यादा अपने सरकार के कार्यों पर ध्यान दें क्योंकि ये ‘पब्लिक है, सब जानती है।’
उन्होंने कहा, ‘‘चार जून को कांग्रेस बेहद बुरी तरह हमीरपुर लोकसभा सीट हार रही है। मुख्यमंत्री भी ये बात भली- भाँति जानते हैं। अपनी खोती विश्वसनीयता, ख़त्म होते जनाधार और इहताशा में उन्होंने झूठ को अपना आवरण बना लिया है। आज मेडिकल कॉलेज और रेल पर झूठ बोल रहे, चार जून को ये ईवीएम का रोना रोयेंगे। जनता के आशीर्वाद से मोदी सरकार से जोलसप्पड़ में मेडिकल कॉलेज की मंज़ूरी करवाई, जमीन भी हमने उपलब्ध कराई, शिलान्यास भी हमने किया, निर्माण कार्य भी हमने ही शुरु कराया, और उद्घाटन भी हम ही करेंगे। मगर मुख्यमंत्री को झूठ बोलने की बीमारी लग चुकी है और इसी लिए वो गली-गली मेडिकल कॉलेज का रोना रो रहे हैं।’’
श्री ठाकुर ने आगे हमीरपुर मेडिकल कॉलेज की घोषणा से लेकर बनने और उद्घाटन तक का संपूर्ण विवरण देते हुए बताया, श्री सुक्खू याददाश्त दुरुस्त करते हुए बताना चाहूँगा कि एक मार्च 2014 को, जोनल अस्पताल मंडी में 100 बिस्तरों वाले मातृ-शिशु ब्लॉक (17 करोड़ रुपये की लागत) की आधारशिला रखते हुए, तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, गुलाम नबी आज़ाद ने हिमाचल प्रदेश के लिए दो मेडिकल कॉलेजों (चंबा और नाहन) के साथ-साथ दो ट्रॉमा सेंटर और एक बर्न सेंटर के स्थापन कि घोषणा की। इस घोषणा का उद्देश्य पूर्णतः 2014 के लोकसभा चुनावों को प्रभावित करना था क्योंकि इसमें किसी भी तरह का बजटीय प्रावधान नहीं था। इसके अतिरिक्त उन्होंने उस समय खराब मौसम के कारण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से टांडा मेडिकल कॉलेज के अधूरे सुपर स्पेशलिटी अस्पताल ब्लॉक का उद्घाटन किया था। उसमे भी हमीरपुर मेडिकल कॉलेज का कोई उल्लेख नहीं था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पांच मार्च 2014 को राज्य मंत्रीमण्डल की बैठक हुई और स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने का निर्णय लिया गया। उसी दिन, भारत के चुनाव आयोग ने लोकसभा के लिए आम चुनावों कि घोषणा कर दी, जिससे आदर्श आचार संहिता लागू हो गई तो ऐसे में इस मंत्रीमण्डल की बैठक और एमओयू का कोई मतलब नहीं रह गया। चुनाव के बाद एनडीए सरकार बनने के बाद यूपीए सरकार के पास आगे कोई ठोस कदम उठाने का मौका नहीं रह गया था। नतीजतन, इन दो मेडिकल कॉलेजों की घोषणा का विषय भी मेरे द्वारा उठाए जाने तक अधूरी ही रह गई थी।’’
श्री ठाकुर ने कहा, ‘‘विभिन्न स्तरों पर व्यक्तिगत मुलाक़ातों और पत्राचार के माध्यम से स्वास्थ्य और कल्याण मंत्रालय के साथ इस मामले को सक्रिय रूप से उठाया और काफी प्रयासों के बाद न केवल चंबा और नाहन मेडिकल कॉलेजों के लिए धन जारी हुआ, बल्कि चरणबद्ध उद्घाटन के लिए निर्धारित 157 नए मेडिकल कॉलेजों की सूची में डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज, हमीरपुर को भी सफलतापूर्वक शामिल कराया।’’
उन्हाेंने कहा कि सुक्खू मेडिकल कॉलेज के नाम सिर्फ़ गुमराह कर रहे हैं। मोदी सरकार में जब श्री जेपी नड्डा जी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री थे तब 2015 में मैंने जोलसप्पड़ में मेडिकल कॉलेज स्वीकृत करवाकर 174 करोड़ का बजट देकर इस प्रोजेक्ट को शुरू करवाया। वर्ष 2015 में केंद्र से स्वीकृति के बावजूद 2.5 साल तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस सरकार ने इस प्रोजेक्ट को लटकाए रखा, ज़मीन तक नहीं दी। वर्ष 2017 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर जी ने मेडिकल कॉलेज के लिए ज़मीन दी। वर्तमान स्थल पर भूमि सुरक्षित करने और पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से मंजूरी प्राप्त करने के बाद 6 जून, 2018 को डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर की आधारशिला कार्यक्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, तब के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा और अन्य जन प्रतिनिधियों समेत मैं स्वयं मौजूद था। आज भारत सरकार ने मूल परियोजना लागत (189 करोड़ रुपये) का अपना पूरा हिस्सा (90 फीसदी) जारी कर दिया है, जो कि 170.10 करोड़ है। चंबा और नाहन मेडिकल कॉलेजों के लिए भी समान धन आवंटन सुनिश्चित किया जैसा कि स्वास्थ्य मंत्रालय की 24 अक्टूबर, 2021 की प्रेस विज्ञप्ति से पता चलता है। इस विज्ञप्ति में 157 मेडिकल कॉलेजों के लिए लगभग 17691.08 करोड़ रुपये का आवंटन होने की पूरी जानकारी थी जिससे प्रति कॉलेज 189 करोड़ रुपए का आवंटन हुआ। शैक्षणिक सत्र 2018-19 से 120 एमबीबीएस सीटों की प्रवेश क्षमता के साथ ये मेडिकल कॉलेज कार्यात्मक है।’’
सं. उप्रेती
वार्ता
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