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कुल्लू के कोट में चिरायता की खेती का सफल प्रदर्शन

कुल्लू, 11 जून (वार्ता) वाइल्ड लाइफ डिविजन कुल्लू के कोट में जाइका वानिकी परियोजना ने औषधीय पौधे चिरायता की खेती का सफल प्रदर्शन का आयोजन किया। परियोजना के विशेषज्ञों ने मंगलवार को बीएमसी सब कमेटी लोट के तहत कोट में ग्रामीणों को चिरायता की खेती के बारे महत्वपूर्ण जानकारी दी।
जाइका वानिकी परियोजना के जैव विविधता विशेषज्ञ डाॅ. एसके काप्टा और हिमालयन रिसर्च ग्रुप के निदेशक डाॅ. लाल सिंह ने बीएमसी सब कमेटी को चिरायता की खेती के लिए बिजाई से लेकर रखरखाव और हार्वेस्टिंग के तरीकों से अवगत करवाया और बिजाई के बारे में बताया।
डाॅ. काप्टा ने चिरायता के संरक्षण, बीमारियों से बचाव से लेकर सभी प्रकार की बेहतरीन जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस खेती को प्रक्रिया पूरी होने में 18 महीने लग जाते हैं। इस तरह के औषधीय पौधों की खेती कर ग्रामीणों को आत्मनिर्भता से आजीविका सुधार करने का मौका मिलेगा। डाॅ. काप्टा ने कहा कि जाइका वानिकी परियोजना इस क्षेत्र में बेहतरीन कार्य कर रही है और डीएफओ वाइल्ड लाइफ कुल्लू की टीम के कार्य भी काफी सराहनीय हैं। उन्होंने बीएमसी सब कमेटी लोट के ग्रामीणों को चिरायता की खेती की ओर अग्रसर होने के लिए प्रोत्साहित किया।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में विलुप्त होते औषधीय पौधे चिरायता की खेती कर जाइका वानिकी परियोजना को बीते वर्ष पहली कामयाबी मिली थी।
बता दें कि जिला मंडी के नाचन वन मंडल के तहत छैन मैगल, बुखरास और रोहाल गांव से संबंध रखने वाली महिलाओं के एक समूह ने औषधीय प्रजातियों की पहली खेप उतार दी थी। ऐसे में अब आने वाले समय में कुल्लू समेत राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी चिरायता की सफल खेती होगी, जिससे लोगों की आर्थिकी में भी सुधार आ सकता है।
इस अवसर पर डीएफओ वाइल्ड लाइफ कुल्लू राजेश शर्मा, एसीएफ कुल्लू राजेश ठाकुर, एसएमएस वाइल्ड लाइफ कुल्लू प्रिया ठाकुर, रेंज ऑफिसर वाइल्ड लाइफ कुल्लू रेंज रमेश कुमार और बीएमसी सब कमेटी लोट के प्रधान दीपी सिंह मौजूद रहे।
सं. उप्रेती
वार्ता
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