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मीरा के अलौकिक व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं को उजागर करने की आवश्यकता-प्रो. सारंगदेवोत

उदयपुर 20 अक्टुबर (वार्ता) राजस्थान में जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस. एस. सारंगदेवोत ने श्रीकृष्ण भक्त मीराबाई को अपने युग की विशिष्ठ सृजनधर्मी किरण बताते हुये कहा है कि मीरा ने अपने समर्पण भाव से कण कण को अपनी भक्ति भावना से सींच दिया।
प्रो सारंगदेवात आज विश्वविद्यालय में भक्तिमति मीरा की जयंति पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भक्ति, शक्ति और बलिदान का प्रतीक मेवाड़ में महाराणा प्रताप, मीरा बाई तथा पन्नाधाय हुई। उन्होने कहा कि महाकवि चन्द्रवरदाई ने हिन्दी भाषा का पहला प्रामाणिक ग्रंथ महाकाव्य पृथ्वीराज रासों की रचना की। इस काव्य में मोहम्मद गोरी एवं पृथ्वीराज चौहान के युद्ध का प्रामाणिक वर्णन किया गया।
इस काव्य में मोहम्मद गोरी एवं पृथ्वीराज चौहान के युद्ध का प्रमाणिक वर्णन किया गया।
रामसिंह
वार्ता
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