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सेना ने पिनाका एमके-1 राॅकेट सिस्टम और पिनाका एरिया डेनियल मुनिशन रॉकेट सिस्टम का किया परीक्षण

जैसलमेर, 20 जून (वार्ता) देश में वायुसेना की मारक क्षमता को मजबूत करने के लिए मेक इन इंडिया के तहत कई नये उपरकण, मिसाईल, राॅकेट एवं टैंक एवं गन सेना के बेड़े में शामिल किये जा रहे हैं और इसी के तहत राजस्थान में जैसलमेर के पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में पिनाका एमके-1 (पीईआरएस) रॉकेट सिस्टम और पिनाका एरिया डेनियल मुनिशन रॉकेट सिस्टम का सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया गया।
पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और सेना द्वारा पिछले दो-तीन दिनों से जारी पिनाका फायरिंग में विभिन्न स्तर पर करीब एक दर्जन से ज्यादा पीईआरएस रॉकेट दागे गए। इस अवसर पर डीआरडीओ एवं सेना के उच्च अधिकारी मौजूद थे। नए पिनाका अपग्रेड वर्जन रॉकेट ने सभी परीक्षणों में रॉकेटों द्वारा सटीक निशाने लगाए गए। इन परीक्षणों के साथ उद्योग द्वारा पीईआरएस के प्रौद्योगिकी अवशोषण का प्रारंभिक चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है और उद्योग भागीदार रॉकेट सिस्टम के उपयोगकर्ता परीक्षण उत्पादन के लिए तैयार हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सेना ने देश में ही विकसित उन्नत पिनाका मिसाईल के एक्सटेंडेड रेंज वर्जन का सफल परीक्षण जैसलमेर की पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में किया गया। इस आर्टिलरी मिसाईल सिस्टम ने टारगेट पर अचूक निशाने साधे और यह पिनाका का नया सिस्टम अपने नए मानकों पर एकदम खरा उतरा। इससे सेना की मारक क्षमता काफी बढ़ जाएगी। इस परीक्षण के दौरान डीआरडीओ एवं सेना के आर्टिलरी के कुछ अधिकारी उपस्थित थे। इस अवसर पर डीआरडीओ के अधिकारियों ने पिनाका एमके-1 के साथ ही रॉकेट सिस्टम और पिनाका एरिया डेनियल मुनिशन रॉकेट सिस्टम के सफल परीक्षण की पुष्टि की।
उल्लेखनीय है कि पिनाका रॉकेट प्रणाली को आयुध अनुसंधान और विकास परीक्षण पुणे द्वारा विकसित किया गया है। जो उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला, डीआरडीओ की पुणे स्थित एक अन्य प्रयोगशाला द्वारा समर्थित है। बताया जा रहा है कि पीईआरएस पिनाका संस्करण का उन्नत संस्करण है जो पिछले एक दशक से भारतीय सेना के साथ सेवा में है। उभरती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रणाली को उन्नत प्रौद्योगिकियों के साथ उन्नत किया गया है। पिनाका के उन्नत रेंज संस्करण की प्रदर्शन प्रभावकारिता स्थापित करने के बाद प्रौद्योगिकी को मुनिशन्स इंडिया लिमिटेड और इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड नागपुर में स्थानांतरित कर दिया गया था। इस अभियान के दौरान डीआरडीओ से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के तहत एमआईएल द्वारा निर्मित रॉकेटों का परीक्षण किया गया। पिनाका रॉकेट सिस्टम में इस्तेमाल किए जा सकने वाले युद्धपोतों और फ्यूज के विभिन्न रूपों का भी पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया।
पिनाका एमके-1 के एडवांस वर्जन का परीक्षण विपरीत परिस्थितियों में सटीक निशाना साधने के लिए किया जा रहा हैं। यह मिसाइल दागने के बाद भी अपनी दिशा को मोड़ सकती है। निशाना लगाने और फिर इसको हिट करने के बाद अपग्रेड सिस्टम के तहत इसका निशाना दागने के बाद भी बदला जा सकेगा और ये बड़ी आसानी से निशाना बदलने के बाद भी लक्ष्य को एक दम सटीक तरीके से हिट करती है। इससे पहले भी पोकरण रेंज में ही 9 अप्रेल को पिनाका सिस्टम प्रणाली का सफल परीक्षण किया गया था।
वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने पिनाका मार्क-1 संस्करण का इस्तेमाल किया था, जिसने पहाड़ पर तैनात पाकिस्तानी चौकियों को सटीकता के साथ निशाना बनाया था और युद्ध में दुश्मन को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया था। पिनाका मिसाइल को दागने वाले सिस्टम को पिनाका रॉकेट सिस्टम कहते है जिसे सेना के वाहन पर ही लॉन्च किया गया है। इसे भारत में ही बनाया गया है भारतीय सेना के लिए डीआरडीओ ने इसे विकसित किया है।
भाटिया जोरा
वार्ता
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08 Aug 2022 | 9:38 PM

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