Tuesday, Jun 18 2024 | Time 04:42 Hrs(IST)
image
राज्य » राजस्थान


जैव विविधता को बचाने के लिए विभिन्न जीन तकनीकियों का करे उपयोग-बलराज

जयपुर 22 मई (वार्ता) राजस्थान में श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर के कुलपति डा बलराज सिंह ने कहा है कि जैव विविधता को बचाने के लिए विभिन्न जीन तकनीकियों का उपयोग एवं संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
डा सिंह अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस थीम "बी ए पार्ट ऑफ़ प्लान" के अवसर पर राजस्थान राज्य जैव विविधता बोर्ड के सौजन्य से आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि साथ ही प्राकृतिक संसाधनों का अनुकूल उपयोग करना चाहिए। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों द्वारा जैव विविधता को बचाने के लिए एक ही प्लेटफार्म पर मंथन किया गया। उन्होंने कहा कि जैव विविधता शब्द का प्रयोग पृथ्वी पर जीवन की विशाल विविधता का वर्णन करने के संदर्भ में किया जाता है। इसका उपयोग विशेष रूप से एक क्षेत्र या पारिस्थितिकी तंत्र में सभी प्रजातियों को संदर्भित करने के लिए किया जा सकता है। जैव विविधता पौधों, बैक्टीरिया, जानवरों और मनुष्यों सहित हर जीवित चीज को संदर्भित करती है। इसे अक्सर पौधों, जानवरों और सूक्ष्मजीवों की विस्तृत विविधता के संदर्भ में समझा जाता है, लेकिन इसमें प्रत्येक प्रजाति में विद्यमान आनुवंशिक अंतर भी शामिल होता है।
डॉ सिंह ने शुष्क एवं अर्द्ध शुष्क क्षेत्रों की जैव विविधता पर प्रकाश डालते हुए बताया की कुल क्षेत्र का 12 प्रतिशत क्षेत्र शुष्क एग्रो क्लाइमैटिक जोन के तहत आता है, जैव विविधता शब्द बायोलॉजिकल जैव विविधता से संबंधित है l
उन्होंने कहा सभी देशों को जंगली जातियों की पहचान कर उनके प्राकृतिक आवास को संरक्षित करने का प्रयास करना चाहिए l ज्ञात प्रजातियों में 60 प्रतिशत कीट, 16 प्रतिशत उच्च पादप ए्ं 0.3 प्रतिशत स्तनधारी जीव है।
उन्होंने जैव विविधता के प्रकारों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जैव विविधता से ही पृथ्वी पर जीवन संभव है। जैव विविधता के बिना सम्पूर्ण विश्व के भोजन का उत्पादन संभव नहीं है । संसाधनों के अतिदोहन, आक्रामक विदेशी प्रजातिया , जलवायु परिवर्तन एवं प्राकृतिक आवास के नष्ट होने के कारण जैव विविधता को खतरा बढ़ता जा रहा है ।
उन्होंने बताया कि राजस्थान में खीप, फोग व गूगल संकटग्रस्त जातियों की श्रेणी में है l पॉलिनेटर गार्डन भी जैव विविधता के सरंक्षण के लिए महत्त्वपूर्ण है, डॉ बलराज सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष महाविद्यालय में लगाए गए पौधो की वृद्धि अच्छी रही है व इस साल भी महाविद्यालय द्वारा बड़े स्केल पर पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा ।
जोरा
वार्ता
More News
महाराज दाहिर सेन वर्तमान में भी प्रासंगिक- देवनानी

महाराज दाहिर सेन वर्तमान में भी प्रासंगिक- देवनानी

17 Jun 2024 | 9:51 PM

जयपुर, 17 जून (वार्ता) राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सिंधु सम्राट महाराज दाहिर सेन को वर्तमान में भी प्रासंगिक बताते हुए कहा है कि उन्होंने सनातन हिंदू धर्म को राजधर्म घोषित किया था।

see more..
image