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राज्य


लुप्तप्राय शारदा लिपि को पुनर्जीवित करने के प्रयास

जम्मू 25 अगस्त (वार्ता ) जम्मू कश्मीर में लुप्तप्राय कश्मीरी लिपि शारदा को पुनर्जीवित करने के प्रयास चल रहे हैं ।
इस भाषा को पुनर्जीवित करने के लिए जम्मू संभाग में पहली बार एक कार्यशाला का आयोजन किया गया है । इसमें शारदा का ककहरा पढाने के अलावा इस भाषा की पांडुलिपियों का अनुवाद भी सिखाया जा रहा है ।
जम्मू विश्वविद्यालय में कल से शुरू इस पांच दिवसीय कार्यशाला का आयोजन जम्मू विश्वविद्यालय ़ और इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फार आर्टस ने गैर सरकारी संगठन मिलेनियम इंडिया एडुकेशन फाउंडेशन के सहयोग से किया है ।
एमआईइएफ के निदेशक डा उदय कारू ने बताया कि इस कार्यशाला का अायोजन इसलिए किया जा रहा है क्योंकि शारदा लिपि लुप्त होेने के कगार पर पहुंच गयी है । इसका कारण यह है कि यह भाषा देश में कहीं भी नहीं पढायी जाती है । जिन चंद लोगों को इसका ज्ञान है वे उम्र के अंतिम पडाव में पहुंच चुके है और उनके साथ ही यह भाषा भी लुप्त होती जा रही है ।
जम्मू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आर डी शर्मा ने कल इस कार्यशाला का उद्घाटन किया 1
कार्यशाला में शारदा विशेषज्ञ एवं कश्मीरी भाषाविद डा एस एस तोशखाली ़ राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्रोफेसर रामप्रताप वेदालंकार ़ आईजीएनसीए में शारदा विशेषज्ञ डा कीर्ति कांत शर्मा तथा अन्य मौजूद थे ।
एमआईइएफ अब तक 300 लोगों को शारदा में प्रशिक्षित कर चुका है 1
नीलिमा
वार्ता 1825
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