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खेल


सिंधू के फाइनल में पहुंचने और सायना को कांस्य पदक मिलने से भारत का एशियाई खेलों के एकल मुकाबलों में पिछले 36 वर्षाें का सूखा समाप्त हो गया है। सैयद मोदी ने आखिरी बार 1982 के नयी दिल्ली एशियाई खेलों में पुरूष एकल वर्ग में कांस्य पदक जीता था। भारत का इन खेलों में यह बैडमिंटन में दूसरा पदक है।
23 साल की सिंधू इस हार से फाइनल में लगातार पराजित होने का सिलसिला हालांकि नहीं तोड़ सकीं जिसकी उनसे भारी अपेक्षा थी। वह 2016 के रियो ओलंपिक, इस साल के राष्ट्रमंडल खेलों और विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में हारकर रजत पदक ही जीत पायी थीं और मंगलवार को एशियाई खेलों के फाइनल में ही उन्हें शिकस्त मिली।
विश्व की नंबर एक खिलाड़ी ताई के खिलाफ शुरूआत से ही सिंधू दबाव में दिखाई दीं और शुरूआत से ही पिछड़ती चली गयीं। ताई ने ओपनिंग गेम में लगातार अंक लेते हुये 5-0 की बढ़त बनाई। यहां जीबीके बैडमिंटन स्टेडियम में खचाखच भीड़ सिंधू की हौंसला अफजाई करती रही और भारतीय खिलाड़ी ने एक एक अंक के लिये संघर्ष किया और एक समय ताई को गलती करने के लिये मजबूर किया। हालांकि उस समय भी सिंधू 6-10 से पीछे चल रही थीं।
ब्रेक के समय शीर्ष वरीय खिलाड़ी ने 11-7 की बढ़त बनाई और लगातार अंक बटोरे और स्कोर 20-13 किया तथा बेहतरीन स्मैश लगाते हुये 21-13 से गेम जीता। दूसरे गेम में भी ओलंपिक रजत विजेता उतने ही दबाव में दिखीं। तीसरी वरीय सिंधू मैच में सेमीफाइनल जैसा जोश नहीं दिखा सकीं और ताई एकतरफा अंदाज़ में अंक लेती रहीं।
एक समय सिंधू चार अंकों से 8-12 पर पिछड़ गयीं। सिंधू ने फिर गलती की और एक समय वह 10-15 से पीछे हो गयीं। भारतीय खिलाड़ी ने फिर अच्छा स्मैश लगाकर वापसी का प्रयास किया लेकिन ताई ने लगातार अंक लिये और स्कोर 19-15 पहुंचा दिया। दोनों खिलाड़ियों ने फिर मैच प्वांइट पर लंबी रैली खेली और ताई ने इससे जीतते हुये 21-16 से गेम और स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
प्रीति
वार्ता
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