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संस्कृत सभी भाषाआें की जननी: कोविंद

संस्कृत सभी भाषाआें की जननी: कोविंद

पुरी, 18 मार्च (वार्ता) राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने आज कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है और इसमें विज्ञान तथा इससे संबद्व ज्ञान का विस्तृत वर्णन है।

श्री कोविंद ने ओड़िशा के अपने दो दिवसीय दौरे के अंतिम दिन आज राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान (डीम्ड विश्वविद्यालय) के शताब्दी समारोह कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए कहा कि यूराेप, अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों में विद्वान संस्कृत भाषा पर शोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा में अथाह वैज्ञानिक ज्ञान का वर्णन किया गया है और इसी भाषा में योग के बारे में भी जानकारी दी गई है तथा योग को आज पूरे विश्व में अपनाया जा रहा है।

इस मौके पर उन्होंने 2015 के मशहूर नाबाकालेबार अनुष्ठान को रेखांकित करते हुए एक हजार अौर दस रूपए के सिक्के भी जारी किए। इस अनुष्ठान में भगवान जगन्नाथ और उनके बंधु बांधवों की पूजा होती है जो हिन्दू नव वर्ष के अवसर पर आयोजित की जाती है। इस दौरान विश्वविद्यालय से संबद्व एक स्मारिका का विमोचन भी किया गया।

राष्ट्रपति ने पुरी को पूर्वी भारत की काशी करार देते हुए कहा कि यह क्षेत्र ज्ञान की विभिन्न धाराअाें और धर्म तथा संस्कृति का एक अनुपम केन्द्र रहा है और यहां आयोजित होने वाली रथ यात्रा लोगों के दिलों में विशिष्ट स्थान रखती है और वह भी इस पंरपरा से काभी प्रभावित रहे हैं।

श्री कोविंद ने कहा कि देश के चार धामों में पुरी धाम का अपना ही विशेष महत्व है और इन चार धामों की स्थापना देश के चार कोनों में आदि शंकराचार्य ने की थी जिन्होंने देश को एक पंरपरा के सूत्र में पिरोने की दिशा में अहम योगदान दिया है।

इस अवसर पर उन्होंने संस्कृत शिक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण याेगदान देने के लिए नौ विद्वानों को सम्मानित किया। इस कार्यक्रम में ओड़िशा के राज्यपाल एस सी जमीर, पुरी गजपति महाराजा दिब्या सिंह देब, केन्द्रीय पेट्रोलियम अौर प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, आदिवासी कल्याण मामलाें के मंत्री जुआल आेराम, ओड़िशा के उच्च शिक्षा मंत्री अनत दास और विश्वविद्यालय के प्रिंसीपल अतुल कुमार नंदा भी उपस्थित थे।

जितेन्द्र

वार्ता

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