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जन्माष्टमी पर द्वारका और डाकोर के कृष्ण मंदिरों में उमड़ी भक्तो की भीड़

द्वारका/डाकोर (गुजरात), 03 सितंबर (वार्ता) गुजरात स्थित भगवान कृष्ण के दो विश्वप्रसिद्ध मंदिरों सौराष्ट्र में द्वारका के जगत मंदिर तथा मध्य गुजरात के डाकोर के रणछोड़राय जी मंदिर में आज जन्माष्टमी के मौके पर मनोहारी सजावट की गयी है तथा विशेष पूजा अर्चना के आयोजनों के बीच भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी।
भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण को जिनका अवतार माना जाता है, के उत्तर गुजरात स्थित विख्यात शामलाजी मंदिर में कुछ ऐसा ही माहौल दिखा।
तीनो ही मंदिरों में भगवान की प्रतिमा का आज रत्नाभूषणों से विशेष शृंगार किया गया।
द्वारका के जगत मंदिर में हर साल जन्माष्टमी के मौके पर मध्य रात्रि से तड़के ढाई बजे तक विशेष जन्मोत्सव दर्शन के दौरान भगवान को विशेष अाभूषणों से सजाया जाता है। मंदिर के उप प्रशासक ने बताया कि नियमित आयोजित होने वाली मंगला, शृंगार, संध्या और शयन आरती के स्थान पर जन्माष्टमी का मुख्य आकर्षण यहीं होता है। आम तौर पर इस मंदिर में रोज दस हजार के आसपास दर्शनार्थी आते हैं पर जन्माष्टमी की पूर्व संध्या पर यह संख्या 50 हजार या उससे अधिक और जन्माष्टमी को 80 हजार से एक लाख तक पहुंच जाती है।
उधर डाकोर मंदिर के संचालन ट्रस्ट के एक अधिकारी ने बताया कि आज कृष्ण स्वरूप रणछोड़रायजी की प्रतिमा को तीन से चार किलो सोने से बने और रत्न एवं हीर आदि जटित मुकुट पहनाया जाता है। ऐसा साल भर में जन्माष्टमी के अलावा केवल दो अौर मौकों अाश्विन और कार्तिक पूर्णिमा को ही किया जाता है।
उन्होने बताया कि आम तौर पर यह मंदिर सुबह साढ़े छह बजे मंगला आरती के साथ खुलता है और शाम साढ़े सात बजे अंतिम आरती शयना आरती के साथ बंद हो जाता है पर जन्माष्टमी को यह मंदिर के पट मध्यरात्रि के बाद भी खुले रहते हैं।
रजनीश
वार्ता
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