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विजय हजारे ट्रॉफी के लिए बिहार टीम की घोषणा नहीं करना बीसीए का फर्जीवाड़ा : सीएबी

पटना 03 सितंबर (वार्ता) क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार (सीएबी) ने निबंधन रद्द हो चुकी संस्था बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) की हुई बैठक को अवैध करार देते हुये आज कहा कि विजय हजारे ट्रॉफी के लिए बिहार टीम की घोषणा नहीं करना बीसीए पदाधिकारियों के फर्जीवाड़े को दर्शाता है।
सीएबी के सचिव आदित्य वर्मा एवं बीसीए मीडिया कमेटी के पूर्व अध्यक्ष संजीव कुमार मिश्र ने यहां बीसीए की कल हुई बैठक को अवैध बताया और कहा कि यह बीसीए पदाधिकारियों का उच्चतम न्यायालय के आदेश की अवमानना है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि जब बीसीए के अयोग्य सचिव ने लोढ़ा समिति का हवाला देते हुये तीन से पांच चयनकर्ता बनाने की बात स्वीकार ली है तब विजय हजारे ट्रॉफी के साथ 19 सितंबर से शुरू हो रहे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के प्रथम श्रेणी के मैच खेलने के लिए गुजरात जाने वाली बिहार क्रिकेट टीम की घोषणा क्यों नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि किसी टीम का चयन होने पर इसकी सूचना मीडिया को दी जाती है, तो बीसीए के अधिकारियों ने इसका अभी तक खुलासा क्यों नहीं किया। क्या किसी फर्जीवाड़े के तहत बिहार टीम का चयन कर केवल चयनकर्ताओं के हस्ताक्षर लेकर टीम को मैच खेलने के लिए गुजरात भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी आयु वर्ग की टीम के लिए कोच, फीजियो और प्रशिक्षक के नाम की घोषणा कर दी गई है लेकिन विजय हजारे ट्रॉफी के लिए अभी तक बिहार टीम की घोषणा नहीं करना किसी बड़े फर्जीवाड़े का संकेत है।
श्री वर्मा और श्री मिश्र ने कहा कि विभाजन के बाद अपनी पहचान खो चुके बिहार के खिलाड़ियों को 18 वर्ष बाद सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2018-19 में एक बार फिर बीसीसीआई द्वारा प्रायोजित प्रथम श्रेणी के सभी क्रिकेट मैच के साथ ही अन्य वर्गों में खेलने का मौका दिया है। उन्होंने कहा, “हमारे पास पुख्ता सबूत हैं कि अन्य राज्यों के करीब 20 क्रिकेटर जाली आवासीय एवं जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर बीसीए एवं इनके जिला क्रिकेट संघ को पैसे देकर बिहार से क्रिकेट खेलने आ चुके हैं। बीसीए को राज्य के होनहार क्रिकेटरों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। यदि रिश्वत लेकर खिलाड़ियों को टीम में जगह दी गई तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।”
उन्होंने कहा कि बिहार सरकार के निबंधन विभाग के महानिरीक्षक कार्यालय ने मई 2012 के पटना उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में इस वर्ष 24 अप्रैल को बीसीए के निबंधन को बहाल कर दिया, जो कानून और बिहार सोसाइटी निबंधन अधिनियम की अवमानना है क्योंकि विभाग ने इस वर्ष 27 मार्च, 05 मई और 19 जुलाई को सूचना के अधिकार के तहत मांगे गये जवाब में बताया कि विभाग ने बीसीए का निबंधन रद्द कर दिया है। उन्होंने कहा कि विभाग के 24 अप्रैल के आदेश के खिलाफ शीघ्र ही पटना उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जाएगी।
सूरज शिवा
वार्ता
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