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राज्य


लोकरुचि महाकालेश्वर शाही सवारी दो अंतिम उज्जैन

आज जन्माष्टमी के दिन पर भगवान श्री महाकालेश्वर की शाही सवारी निकाली गई। सवारी के आगे सबसे पहले तोपची कड़ाबीन के धमाके श्रद्धालुओं को राजाधिराज के नगर आगमन की सूचना देते आगे बढ़ रहा था। तोपची के बाद भगवान श्री महाकाल का चांदी का ध्वज, घुड़सवार पुलिस दल, विशेष सशस्त्र बल, स्काउट गाईड, कांग्रेस सेवादल एवं इसके बाद सेवा समिति का बैण्ड मधुर भजनों की धुन बजाते हुए निकला। सम्पूर्ण सवारी मार्ग शिवमय हो गया। मार्ग में श्रद्धालु पालकी के आगमन की प्रतीक्षा में नजर आए।

भगवान महाकालेश्वर की पालकी के आगे साधु-संत चल रहे थे। इसके बाद पुलिस बैण्ड के भक्ति धुनों से वातावरण में भक्ति के रंग बिखेर रहा था। भगवान चन्द्रमौलेश्वर अपनी प्रजा को दर्शन दे रहे थे। पालकी को निकट आते देख घंटों इंतजार कर रहे श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे और जय श्री महाकाल के जयकारे लगाने लगे।

पवित्र क्षिप्रा नदी के घाट पर कलेक्टर मनीष सिंह एवं पुलिस अधीक्षक सचिन अतुलकर ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि श्रद्धालुओं की भीड को नियंत्रण के लिये बेरिकेटिंग लगाकर चाकचौबंद सुरक्षा व्यवस्था की गई है। सम्पूर्ण सवारी मार्ग पर व्यवस्थाओं पर पुलिस अधिकारी निरीक्षण कर नजर रखे है। उन्होने बताया कि 07 स्थानों पर एम्बुलेंस की तैनाती की गई। 16 स्थानों पर पी.ए. सिस्टम लगाए गए। सवारी मार्ग में प्रसाद वितरण पर प्रतिबंध लगाया गया था।
इस बार सवारी मार्गो पर श्रद्धालुओं की सुगम वापसी के लिए पुलिस की व्यवस्था लगाई गई। सवारी के रामघाट पहुँचने पर पालकी का पूजन परम्परानुसार पंडितों द्वारा कराया गया।
सं नाग
वार्ता
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