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उत्तराखंड में अनिवासियों के लिए भूमि खरीदना होगा मुश्किल

नैनीताल 03 सितम्बर (वार्ता) हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर अब उत्तराखंड में भी अनिवासियों के लिये जमीन खरीदना मुश्किल हो जाएगा। सरकार इस संबंध में जल्द ही एक कानून लाने जा रही है। सरकार ने इस संबध में जोर शोर से तैयारी शुरू कर दी है। जल्द ही कानून अस्तित्व में आ जाएगा।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय की महत्वपूर्ण पहल पर यह अभूतपूर्व शुरूआत हुई है। दरअसल कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा की अध्यक्षता वाली युगल पीठ ने गत 21 अगस्त को उत्तरकाशी के नाबालिग दुष्कर्म मामले की सुनवाई करते हुए सरकार को इस संबंध में निर्देश दिये थे। पीठ ने सरकार से पूछा था कि क्या सरकार प्रदेश में बाहरी लोगों के कृषि भूमि खरीदने पर प्रतिबंध लगाने की योजना बना रही है।
इसके बाद सरकार में कुछ हलचल हुई। गत 31 अगस्त को सरकार ने उच्च न्यायालय में अपना मंतव्य जाहिर किया। इस संबंध में यूनीवार्ता से बात करते हुए उत्तराखंड के महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर ने कहा कि यह नीतिगत मामला है। प्रदेश सरकार ही इस पर अंतिम निर्णय लेगी लेकिन महाधिवक्ता ने साफ साफ कहा कि उच्च न्यायालय की पहल के बाद उन्होंने सरकार को इस संबंध में प्रस्ताव सौंप दिया है।
अब स्पष्ट है कि सरकार के पाले में गेंद है। सरकार को तीन सप्ताह में उच्च न्यायालय को पूरी प्रक्रिया के संबंध में जवाब देना है। यदि उच्च न्यायालय की पहल रंग लायी तो अनिवासियों को प्रदेश में कृषि भूमि खरीदना मुश्किल हो जाएगा। सिर्फ प्रदेश का ही कृषक अनिवासी यहां जमीन खरीदने का हकदार होगा।
उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश की विधानसभा इस संबंध में ‘एचपी टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म्स एक्ट 1972’ पहले ही पास कर चुकी है। इस कानून के बनने से प्रदेश में कृषि भूमि की अंधाधुंध खरीद फरोख्त पर प्रतिबंध लगा है। इस अधिनियम की धारा 118 केवल उन लोगों को हिमाचल प्रदेश राज्य में भूमि खरीदने के लिये अनुमति प्रदान करती है जो कि कृषिविद हैं।
यदि एक गैर कृषक हिमाचल प्रदेश राज्य के अंदर भूमि खरीदना चाहता है तो उसे इस संबंध में राज्य सरकार की अनुमति लेना जरूरी है। सरकार की अनुमति के बिना यह संभव नहीं है।
रवीन्द्र, उप्रेती
वार्ता
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