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कपास की खरीद आढ़तियों के माध्यम से न करने के आदेश से रोष

हिसार, 4 सितंबर (वार्ता) केंद्र सरकार के कपास की खरीद आढ़तियों के माध्यम से कराने की बजाय सीधे किसानों से करने के आदेश दिए जाने के खिलाफ आढ़तियों ने आज यहां रोष व्यक्त किया।
अखिल भारतीय व्यापार मंडल के राष्ट्रीय महासचिव व हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष बजरंग गर्ग की अध्यक्षता में आढ़ती प्रतिनिधियों की बैठक अनाज मंडी में हुई। इस बैठक में श्री गर्ग ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार देश से मंडियों में व्यापार खत्म करने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पहले सरसों की खरीद सीधे की और अब नया फरमान जारी करके कपास की खरीद भी आढ़तियों के माध्यम से नहीं करके सीधे केंद्र सरकार की खरीद एजेंसी से करने के आदेश दिए हैं।
श्री गर्ग ने आरोप लगाया कि यह देश के आढ़तियों को बर्बाद करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि देश व प्रदेश के आढ़तियों ने मंडियों में दुकानें करके करोड़ों रुपए अनाज के व्यापार में लगा रखे हैं अगर अनाज की खरीद आढ़तियों के माध्यम से नहीं होगी तो आढ़ती मंडी में दुकान करके क्या करेगा? श्री गर्ग ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण देश का किसान और आढ़ती दोनों को ही भारी नुकसान हो रहा है। सरकार किसान को पूरा भाव ही नहीं दे रही है, जबकि व्यापारी किसान की फसल अच्छे दामों में खरीद रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कपास का सरकारी रेट 5150 रुपए प्रति क्विंटल है और मंडियों में कपास आढ़ती के माध्यम से 5900 रुपए प्रति क्विंटल बिक रही है।
श्री गर्ग ने कहा कि सरकार व्यापारी व किसान में फूट डालने की नाकाम कोशिश कर रही है, जबकि व्यापारी व किसान का चोली-दामन का साथ है और दोनों के परिवारिक संबंध है, जो सदियों चले आ रहे हैं और चलते रहेंगे। उन्होंने कहा कि हरियाणा सहित अन्य कई राज्यों की सरकारों ने मंडियां बना कर व्यापारियों को दुकानें बेचकर व्यापार करने के लाइसेंस दिए हुए हैं तथा हरियाणा सरकार मार्केटिंग बोर्ड बनाकर व्यापारियों से मार्केट फीस भी वसूल रही है ऐसे में अगर केंद्र सरकार अनाज की खरीद सीधे करेगी तो हरियाणा व सभी राज्यों में अनाज मंडी बनाने का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा।
उन्होंने कहा कि सिर्फ हरियाणा की अनाज मंडी के माध्यम से लाखों परिवारों को रोजगार मिला हुआ है। सरकार एक तरफ बेरोजगारी खत्म करने की बात कर रही है, दूसरी तरफ रोजगार छीन कर लोगों को बेरोजगार करने की साजिश रची जा रही है, जो सरासर गलत है। उन्होंने मांग की कि अनाज की खरीद पहले की तरह आढ़तियों के माध्यम से ही की जाये।
उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर एक राज्य स्तरीय व्यापारी प्रतिनिधि सम्मेलन 16 सितंबर को कैथल में किया जाएगा जिसमें आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।
सं महेश विक्रम
वार्ता
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