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राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका :जितेन्द्र

दरभंगा 04 सितम्बर (वार्ता) जाने माने राजनीतिक चिंतक डाॅ. जितेन्द्र नारायण ने राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों के महत्व को रेखांकित करते हुए आज कहा कि राष्ट्रों के निर्माण में शिक्षकों की ही भूमिका रही है, चाहे राष्ट्र पूंजीवादी, साम्यवादी हो या फिर भारत की तरह।
श्री नारायण ने स्वयंसेवी संस्था डाॅ. प्रभात दास फाउंडेशन एवं ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर समाजशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित ‘राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि जिस तरह से परिवार के निर्माण और उसकी उन्नति में परिवार के सदस्यों का योगदान होता है,उसी तरह से राष्ट्र के निर्माण में भी नागरिकों की भूमिका होती है और नागरिकों को उसकी जिम्मेवारी का अहसास शिक्षक ही कराते है। पाश्चात्य गुरुओं ने यदि विश्व को हिटलर और मुसोलिनी जैसे तानाशाह दिये तो भारत के गुरुओं ने चंद्रगुप्त और अशोक जैसे शासक।
राजनीतिक चिंतक ने कहा कि राष्ट्र कैसा होगा, राष्ट्र किस ओर जाएगा इसकी आधारशिला भी गुरू ही रखते हैं तभी तो आचार्य चाणक्य ने कहा है कि कोई भी शिक्षक साधारण नहीं होता, प्रलय और निर्माण दोनों ही उसकी गोद में पलते हैं। शिक्षक सिर्फ कक्षा में पढ़ाने वाला ही नहीं होता बल्कि किसी भी प्रकार के ज्ञान से परिचित कराने वाला व्यक्ति गुरू है।
सं. सतीश सूरज
जारी वार्ता
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