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बंद को देखते हुए मध्यप्रदेश में अलर्ट

भोपाल, 05 सितंबर (वार्ता) अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम में संशोधन के विरोध में कल प्रस्तावित बंद को देखते हुए समूचे मध्यप्रदेश में पुलिस-प्रशासन अलर्ट पर है।
पुलिस-प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। दो अप्रैल को भारत बंद के दौरान मध्यप्रदेश के कुछ हिस्सों में हुई हिंसा और कई लोगों की मौत के बाद अब प्रशासन ने ऐसे क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया है।
पुलिस महानिरीक्षक, गुप्तवार्ता मकरंद देउस्कर ने आज यहां मीडिया को बताया कि पुलिस पूरी तरह सतर्कता बरत रही है। पूरे प्रदेश में विशेष सशस्त्र बल (एसएएफ) की 37 कंपनियां और छह हजार नव आरक्षक उपलब्ध कराए गए हैं। जहां भी आवश्यकता होगी वहां अतिरिक्त बल उपलब्ध कराया जाएगा।
प्रदेश के पेट्रोल पंप भी कल शाम चार बजे तक बंद रहेंगे। मध्यप्रदेश पेट्रोल पंप ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने यूनीवार्ता को बताया कि बंद के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
प्रदेश के छतरपुर, ग्वालियर, सतना, भिंड, शिवपुरी, मुरैना, श्योपुर, राजगढ़ सहित अन्य जिलों में जिला प्रशासन ने ऐहतियातन निषेधाज्ञा लागू कर दी है। निषेधाज्ञा के दौरान इन जिलों की सीमाओं में कोई भी रैली, जुलूस, शोभायात्रा, धरना-प्रदर्शन और सार्वजनिक सभा आदि बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के प्रतिबंधित रहेंगे। साथ ही सोशल मीडिया पर किसी भी ऐसे संदेश का आदान-प्रदान नहीं किया जाएगा, जिससे किसी धर्म, सम्प्रदाय व जाति विशेष की भावना आहत हो या वह राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता को हानि पहुंचाता हो।
इसके पहले श्योपुर में कल शाम मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जन आशीर्वाद यात्रा पर पथराव की घटना का विरोध करते हुए धरना दे रहे जिला भाजपा के प्रमुख पदाधिकारियों व स्थानीय विधायक दुर्गालाल विजय का बहुत से लोगों ने विरोध किया। विरोध करने वाले लोग भाजपा सरकार के विरोध में नारेबाजी कर इस अधिनियम में संशोधन का विरोध कर रहे थे।
मुरैना में भी कई घरों पर लोगों ने इस अधिनियम के विरोध में अपने घरों के बाहर पोस्टर लगा दिए हैं। पोस्टरों में नोटा का समर्थन करते हुए राजनीतिक दलों से अपील की गई है कि वे वोट मांगने नहीं आएं।
प्रदेश के ग्वालियर और चंबल संभाग में इस अधिनियम में संशोधन का तीखा विरोध देखने को मिल रहा है। इसी क्षेत्र में दो अप्रैल को दलितों के बंद के दौरान भारी हिंसा हुई थी और विभिन्न स्थानों पर करीब छह लोगों की मौत हो गई थी। इसी के मद्देनजर अब सवर्णों के प्रस्तावित बंद के दौरान सरकार पूरी तरह अलर्ट है।
सुधीर
वार्ता
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