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बीकानेर संवाददाता के अनुसार कुछ संगठनों द्वारा अनुसूचित जाति जनजाति विधेयक के विरोध में आज बंद के आह्वान का मिला जुला असर रहा।
व्यापारिक संगठनों द्वारा अपने प्रतिष्ठान बंद रखने की घोषणा के बाद शहर के प्रमुख बाजार पूरी तरह बंद रहे हालांकि इस दौरान फल सब्जियों की दुकानें खुली रहीं। बाजारों पर कुछ दुकानें खुली रहीं तो कुछ बंद रही। इस दौरान शहर में किसी भी संगठन ने जुलूस नहीं निकाला और न ही दुकानें बंद कराने की कोशिश की। व्यापारियों ने स्वेच्छा से दुकानें बंद रखीं या खोली। लिहाजा बंद पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा है। फिलहाल कहीं से किसी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।
इसी प्रकार चित्तौडग़ढ़ जिले में निम्बाहेड़ा को छोडक़र व्यापक असर रहा। इस दौरान बड़ी संख्या में राजकीय कर्मिर्यों के अवकाश पर चले जाने से दफ्तर भी सूने रहे। कहीं किसी अप्रिय घटना के समाचार नहीं है।
राष्ट्रव्यापी बंद के तहत आज सुबह से ही जिला मुख्यालय के अलावा उपखंड मुख्यालय बेंगू , कपासन, गंगरार, भदेसर, बड़ीसादड़ी के साथ छोटे मोटे कस्बों में भी बंद का व्यापक असर देखा गया। जिले के निम्बाहेड़ा नगर में बंद का आंशिक असर रहा और कई प्रतिष्ठान खुले रहे। जिला मुख्यालय पर आज सुबह से ही बंद का असर पुराने शहर सहित उपनगरीय क्षेत्रों चंदेरिया, स्टेशन व सेंथी में व्यापक रूप में देखने को मिला। हालात यह थे कि आम लोग चाय पानी को भी तरस गये।
इधर कलैक्ट्री सहित नगर परिषद एवं पंचायत समिति कार्यालय में भी एक्ट के विरोध में सवर्ण समाज के कार्मिकों के अवकाश पर चले जाने से सन्नाटा छाया रहा और बाहर से अपने सरकारी कार्यों को लेकर यहां आने वाले फरियादी निराश लौटे।
इसी बीच युवाओं की कई टोलियां बाईकों पर सवार होकर शहर में घूमती रही लेकिन स्वैच्छिक बंद के कारण कहीं कोई अप्रिय घटना के समाचार नहीं मिले। टोलियों के साथ पुलिस का भी व्यापक बल साथ साथ घूमता रहा।
दोपहर बाद बंद समर्थक संगठनों श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के बृजेंद्रसिंह भाटी, परशूराम सेना के ओम शर्मा दुर्ग, समता मंच के राधेश्याम जोशी व अन्य के नेतृत्व सैंकड़ों लोग कलक्ट्री पर एकत्र हुए प्रशासन को केंद्र सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा।
पारीक रमेश
वार्ता
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