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समेकित सहकारी विकास परियोजना से होगी किसानों की आय दोगुनी

देहरादून 06 सितंबर (वार्ता) उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने गुरुवार को कहा कि समेकित सहकारी विकास परियोजना किसानों की आय दोगुनी करने में महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे राज्य के 50 हजार किसानों को फायदा होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के सहयोग से 3632 करोड़ रूपये की समेकित सहकारी विकास परियोजना को प्रदेश में लाया जा रहा है।
श्री रावत ने कहा एनसीडीसी द्वारा वित्त पोषित इस योजना में 80 प्रतिशत ऋण के रूप में और 20 प्रतिशत अनुदान के रूप में मिलेगा। इसमें काॅपरेटिव एवं कार्पोरेट में समन्वय पर भी बल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य में जल्द ही एनसीडीसी द्वारा राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना की शुरूआत की जायेगी।
सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के सहयोग से 3632 करोड़ रुपये की समेकित सहकारी विकास परियोजना को प्रदेश में लाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय दुगुनी करने के प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी के लक्ष्य को पूर्ण करने में यह परियोजना महत्वपूर्ण साबित होगी। इस परियोजना को सफल बनाने में सहकारी, कृषि, उद्यान, मत्स्य, डेयरी एवं सम्बन्धित विभागों की अहम भूमिका होगी। इस परियोजना से प्रदेश के 50 हजार किसानों को फायदा होगा।
पहले चरण में बहुद्देशीय सहकारी समितियों एवं उनके जिलास्तरीय एवं शीर्ष निकाय, कृषि, उद्यान, जड़ी-बूटी, रेशम, सगंध पौध आदि का सहकारी सामूहिक खेती द्वारा वृहद उत्पादन, परिवहन, विपणन, दुग्ध विकास, पशुपालन एवं मत्स्य पालन की विशेष त्रिस्तरीय सहकारी संस्थाओं की आवश्यकताओं को शामिल किया गया है।
इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन से पर्वतीय क्षेत्र के निवासियों को निम्न स्तरीय रोजगार की तलाश में जबरन पलायन होने से रोका जा सकता है। डीपीआर में बहुद्देशीय सहकारी समितियों और अन्य विशेष सहकारी संस्थाओं के लिए वृहद आवंटन की सिफारिश की है। प्रत्येक बहुद्देशीय सहकारी समितियों की नवीन संरचना हेतु पहल की दिशा में लगभग तीन से चार करोड़ रुपये आवंटित किए जायेंगे।
उन्होंने कहा कि ई-मंडी, शीत श्रृंखला, रसद, गोदामों द्वारा कनेक्टिविटी इत्यादि के साथ कृषि उपकरण, खरीद केंद्र, सौर ऊर्जा, बाड़ लगाने, आईटी एवं इंटरनेट सुविधाओं के माध्यम से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा।
सं. उप्रेती
वार्ता
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