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रूपाणी ने किया एग्री एशिया एग्जीबिशन-सेमीनार का उद्घाटन

गांधीनगर, 07 सितम्बर (वार्ता) गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने शुक्रवार को यहां के महात्मा मंदिर में आठवें एग्री एशिया एग्जीबिशन-सेमीनार का उद्घाटन किया।
श्री रूपाणी ने इस मौके पर कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए यह आवश्यक है कि किसान अपनी सोच में बदलाव लाएं और आधुनिक तकनीक युक्त खेती को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ें। कृषि प्रधान देश में जय जवान-जय किसान नारे के साथ पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयीजी ने जय विज्ञान जोड़कर किसानों को तकनीक के अधिकतम इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया है।
उन्होंने कहा कि किसानों की भुजाओं में बल है और यदि उसे बिजली, पानी और बीज के साथ समुचित कृषि ज्ञान-विज्ञान का समन्वय मिले तो पूरी दुनिया की भूख शांत करने की ताकत उसमें है। राज्य सरकार ने पानी और बिजली पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। चेकडैम, नर्मदा योजना, सौनी योजना और सुजलाम सुफलाम योजना के जरिए दूरदराज स्थित गांवों तक सिंचाई का पानी पहुंचाया है। कृषि उत्पादन बढ़े साथ ही खेतीबाड़ी क्षेत्र स्वरोजगार एवं आर्थिक आधार बढ़ाने का जरिया बने ऐसी स्थिति के निर्माण के लिए सरकार ने सौर ऊर्जा से खेती के लिए बिजली उत्पादन करने और अतिरिक्त बिजली को बेचकर आमदनी बढ़ाने की सूर्यशक्ति किसान योजना (स्काय) लागू कर किसानों को आर्थिक आधार मुहैया कराने की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि गुजरात में आयोजित हो रहे एग्री एशिया ने राज्य के किसानों के लिए कृषि केंद्रित अद्यतन ज्ञान-भंडार का कपाट खोल दिया है।
इस अवसर पर भारत स्थित केन्या के राजदूत विलि बेट ने पत्नी के साथ प्रदर्शनी देखा। उन्होंने कहा कि गुजरात और केन्या के पारस्परिक संबंध बरसों पुराने हैं। गुजरातियों ने केन्या और अफ्रीकी देशों में व्यापारी प्रजा के तौर पर ख्याति अर्जित की है।
श्री विलि ने कहा कि केन्या के राष्ट्रपति और भारती के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक विकास एजेंडा तैयार किया है। इसके भाग के रूप में दोनों देश सहयोग के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा कि सहकारी गतिविधि का गुजरात का अमूल मॉडल दुनिया में श्रेष्ठ है और हम इस मॉडल के सहयोग से केन्या में सहकारी गतिविधि से विकास करेंगे। भारत से कृषि, बिजली और आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में मिल रहे सहयोग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे प्रदर्शनी से सिर्फ एशिया ही नहीं बल्कि अफ्रीकी देशों को भी फायदा हो रहा है।
इस अवसर पर केन्द्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग तथा जहाजरानी राज्य मंत्री मनसुखभाई मांडविया ने कहा कि देश भर के छह लाख गांवों का विकास कृषि पर आधारित है और अब खेती के सर्वग्राही विकास की दिशा में काम करना होगा। परंपरागत खेती के साथ विज्ञान एवं तकनीक को भी जोड़ना होगा। कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था को देश भर में खड़ी करने के लिए चल रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए श्री मांडविया ने कहा कि निकटवर्ती नगर के बाजार तक उत्पाद पहुंचाने से लेकर निर्यात तक की व्यवस्था खड़ी की गई है। केन्द्र सरकार के बंदरगाहों पर विशेष जेटी बनाकर फलों एवं साग-सब्जियों सहित कृषि उत्पादों को दुनिया भर के बाजारों तक पहुंचाने का आयोजन हो रहा है। उन्होंने कहा कि देश में करीब 84 मेगा फूड पार्क हैं जहां खाद्य प्रसंस्करण द्वारा मूल्य संवर्धन का कार्य हो रहा है।
श्री मांडविया ने कहा कि तकनीक और बाजार व्यवस्था के साथ ढांचागत सुविधा भी बेहद जरूरी है। गांवों को जोड़ने वाली सड़कें जो पहले एक दिन में 63 किमी की दर से बनती थी, आज 138 किमी प्रतिदिन के हिसाब से बन रही हैं।
अनिल, नीरज
वार्ता
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