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राज्य


उत्तर प्रदेश वृद्धाश्रम निरीक्षण दो अंतिम शामली

वृद्धों ने उपाध्यक्ष को बताया कि उन्हें सुबह केवल एक चाय तथा दो रुपये मूल्य का बिस्कुट का पैकेट दिया जाता
है, और दाल, सब्जी रोटी तक भी नहीं दी जाती। दूध और फल भी कभी मिलता ही नहीं। आश्रम में वृद्धों को किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं मिल रही है जबकि यहां तैनात कर्मचारियों को मोटा वेतन मिलता है। अगर कोई
वृद्ध बीमार हो जाता है तो उसे चिकित्सा सुविधा भी नहीं दी जाती जिसके कारण वे खुद ही किसी प्रकार अपना उपचार कराते हैं। आश्रम में वृद्धों की कोई सुनवाई भी नही की जाती, इससे अच्छा तो वे बाहर रहकर भीख मांगकर अपना
जीवन गुजार लें। वृद्धों का कहना था कि सरकार वृद्धों के लिए वृद्धाश्रम तो बनवाती है लेकिन वहां हो रही वृद्धों की उपेक्षा का पता नहीं चल पाता।
उन्होंने कहा कि आश्रम के कर्मचारी वृद्धों की बातों को सुनकर भी अनुसना करते हैं जिसके कारण उनका यहां रहना मुश्किल हो रहा है। इस दौरान कई वृद्ध महिलाओं की आखों में आंसू तक बह निकले। वृद्धों की पीडा सुनकर महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने संचालिका व स्टाफ को कडी फटकार लगाते हुए आदर्श मंडी पुलिस को उन्हें हिरासत में लेने के निर्देश दिए।
उपाध्यक्ष सुषमा सिंह ने बताया कि उन्हें पता नहीं था कि शामली स्थित वृद्धाश्रम में इतनी खामियां हैं। रविवार को आश्रम में आने के बाद ही उन्हें वृद्धों की पीडा का अहसास हुआ। रजिस्टरों की जांच करने पर पता चला कि जितने लोगों का डाटा रजिस्टर में दर्ज किया गया है,उतने लोग तो आश्रम में है ही नहीं। वे जिले के वृद्धाश्रमों का निरीक्षण
करने आयी हैं। पूछताछ में वृद्धों ने खाना न मिलना, बीमार होने पर उपचार की सुविधा न मिलने सहित जैसे कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए हैं।
सं तेज
वार्ता
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