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एसवाईएल और कर्मचारियों के मुद्दे पर इनेलो का सदन से बहिर्गमन

चंडीगढ़, 10 सितम्बर(वार्ता) सतलुज यमुना सम्पर्क(एसवाईएल) नहर तथा राज्य में रोडवेज और बहु उदेश्यीय स्वास्थय कर्मियों(एमपीएसडब्ल्यू) की हड़ताल पर एस्मा लगाने के मुद्दाें को राज्य विधानसभा में उठाने की अनुमति न मिलने से विपक्षी इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) और कांग्रेस ने हंगामा किया। इनेलो सदस्यों ने इन मुद्दों पर सदन से दो बार सांकेतिक बहिर्गमन किया।
सदन में शून्यकाल के दौरान इनेलो एवं विपक्ष के नेता अभय सिंह चौटाला ने एसवाईएल नहर मुद्दे को लेकर दिये गये काम रोको प्रस्ताव चर्चा कराने की मांग की। इस पर पीठासीन अध्यक्ष ने कहा कि यह मामला उच्चतम न्यायालय में है इसलिये सदन की नियमावली के अनुसार इस पर चर्चा नहीं कराई जा सकती तथा इसे अस्वीकृत कर दिया गया है। श्री चौटाला ने एसवाईएल मुद्दे को राज्य के लिये बेहद अहम बताया। उन्होंने रोडवेज और एमपीएसडब्ल्यू कर्मियों की हड़ताल पर एस्मा लगाने के लिये सरकार की निंदा की तथा एसवाईएल समेत इन दाेंनों मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने दलील दी कि एसवाईएल का मामला अदालत में नहीं है और राज्य सरकार ने इस मुद्दे को केवल उलझाने और लटकाने के लिये अदालत में याचिका दाखिल कर रखी है।
उधर, सदन में इनेलो के समानांतर कांग्रेस विधायक दल के नेता किरण चौधरी के नेतृत्व में पार्टी सदस्यों ने भी कर्मचारियों की हड़ताल और इस पर एस्मा लगाने का मुद्दा उठाया। इनेलो और कांग्रेस ने राज्य सरकार से कर्मचारियों से बातचीत कर उनकी मांगे मानने पर जोर दिया। लेकिन विधानसभा अध्यक्ष के इन दोनों मुद्दों को चर्चा के लिये स्वीकार न किये जाने पर इनेलो सदस्यों ने सदन में सरकार के नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु और श्री चौटाला में एसवाईएल नहर मुद्दे को लेकर तीखी नोंकझोंक भी हुई। वित्त मंत्री ने कहा कि एसवाईएल नहर मुद्दे पर सरकार गम्भीर है और इसके प्रयासों की बदौलत ही अदालत का फैसला राज्य के पक्ष में आया है। उन्होंने कहा कि सरकार एसवाईएल नहर के माध्यम से राज्य के हिस्से का पानी लाने के लिये कटिबद्ध है।
वित्त मंत्री ने कहा कि इनेलो बेवजह एसवाईएल मुद्दे पर राजनीति कर सदन का समय बरबाद कर रहा है। उन्होंने कि पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सरकार द्वारा नदी जल समझौता रद्द किये जाने पर के तत्कालीन इनेलो-भाजपा गठबंधन सरकार से छह भाजपा विधायकों ने अपने इस्तीफे दे दिये थे लेकिन इनेलो ने सत्ता सुख की खातिर ऐसा नहीं किया था इसलिये यह साफ है कि कौन राज्य के हितों के लिये चिंतित है।
सदन में इनेलो सदस्यों की नारेबाजी और उनके अध्यक्ष के आसन के समक्ष आने तथा एसवाईएल मामले पर चर्चा कराने की मांग को लेकर सदन की कार्यवाही काफी देर तक ठप्प रही। अध्यक्ष के बार बार के अनुराेध के बाद भी जब इनेलो सदस्य अपनी सीटों पर नहीं गये तो उन्होंने उन्हें सदन से बाहर निकालने की चेतावनी दी। अध्यक्ष के यह कार्रवाई शुरू करते ही इनेलो सदस्यों ने सदन से सांकेतिक बहिर्गमन किया और फिर शांति से अपनी सीटों पर आकर बैठ गये।
श्री चौटाला ने बाद में सदन में रोजवेज और एमपीएसडब्ल्यू कर्मियों की हड़ताल पर एस्मा लगाने और कर्मचारियों के निलम्बन का मुद्दा भी उठाया और सरकार से कर्मचारियों ने बातचीत कर उनकी मांग मानने की मांग की। इस दौरान सदन में परिवहन मंत्री ने कृष्ण लाल पंवार ने स्पष्ट किया सरकार रोडवेज का निजीकरण करने नहीं जा रही है बल्कि वह लोगों को बेहतर परिवहन सुविधाएं प्रदान करने के लिये प्राइवेट ऑपरेटरों से कुछ रूट पर बसें ले रही है जिस पर रोडवेज कर्मचारी यूनियनों के साथ बातचीत में सहमति भी बनी थी। परिवहन मंत्री के बयान से असंतुष्ट इनेलो सदस्यों ने एक बार फिर सदन से बहिर्गमन किया।
रमेश1936
वार्ता
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