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महादेवी वर्मा की 31वीं पुण्यतिथि पर साहित्यकारों का जमावड़ा

नैनीताल, 11 सितम्बर (वार्ता) वरिष्ठ साहित्यकार जयप्रकाश मानस ने महान साहित्यकार महादेवी वर्मा की 31वीं पुण्यतिथि के मौके पर कहा कि लोक साहित्य की विधाओं में नाटक बहुत ही सशक्त माध्यम है जिसके जरिये समाज में किसी बात का संप्रेषण सहजता से किया जा सकता है।
श्री मानस ने कहा कि नाटकों के माध्यम से दिये गये संदेश का प्रभाव समाज में दूरगामी होता है। उन्होंने कहा कि लोक नाट्य लोक साहित्य की सर्वश्रेष्ठ विधा है जिसके माध्यम से नृत्य, गीत तथा लोक संस्कृति का यथार्थ चित्रण होता है।
श्री मानस रामगढ़ स्थित महादेवी सृजन पीठ और केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित महादेवी वर्मा की पुण्यतिथि के मौके पर नैनीताल में आयोजित समारोह में बोल रहे थे।
इस मौके पर त्रिवेन्दम (केरल) से आये नाट्य विशेषज्ञ वी अशोक ने कहा कि लोक नाट्य से तात्पर्य नाटक के उस रूप से है जिसका संबंध विशिष्ट शिक्षित समाज से भिन्न सर्वसाधारण के जीवन से हो और जो परंपरा से अपने अपने क्षेत्र के जन समुदाय के मनोरंजन का साधन रहा हो। वैदिक युग के पश्चात् दो महाकाव्यों रामायण और महाभारत ने लोक नाट्यों के विकास में पर्याप्त योगदान दिया है। इसका वर्तमान स्वरूप रामलीला और रासलीला है।
कुमाऊं विवि के कुलपति डीके नौडियाल ने संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कहा कि लोक जीवन में परंपराएं अविरल प्रवाह के रूप में बहती हैं। जो समाज अपनी संस्कृति और परपंराओं से जितना अधिक गहराई से जुड़ा होगा वह समाज उतना ही अधिक संस्कारित होगा।
‘लोक नाट्य: परंपरा और विकास’ विषय पर आयोजित इस त्रिदिवसीय संगोष्ठी को त्रिभुवन गिरी, डा. शशि पांडे, आदि साहित्यकारों ने भी संबोधित किया। इस मौके पर साहित्य जगत की अनेक विभूतियां मौजूद रहीं।
रवीन्द्र.संजय
संजय
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