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वाराणसी में गंगा खतरे के करीब, कॉलोनियों में पानी घुसने से अफरातफरी

वाराणसी में गंगा खतरे के करीब, कॉलोनियों में पानी घुसने से अफरातफरी

वाराणसी, 12 सितंबर (वार्ता) । उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु स्तर 70.26 मीटर के करीब पहुंचने के बाद बुधवार तड़के चार बजे से 70.18 मीटर पर स्थिर हो गया लेकिन इस बीच निचले इलाकों में बसी कालोनियों में पानी घुस गया है।



केंद्रीय जल आयोग के बाढ़ पूर्वानुमान केंद्र के सूत्रों के अुनसार, बुधवार तड़के चार बजे से अपराह्न पांच बजे तक जलस्तर 70.18 मीटर पर स्थिर है जबकि खतरे का निशान 71.26 मीटर पर है हालांकि गंगा एवं वरुणा नदी के निचले इलाके में बसीं अनेक कॉलोनियों में पानी घुस गया जिससे वहां रहने वाले लोग पलायन कर सुरक्षित ठिकानों की ओर जा रहे हैं। कोनिया, मारुतिनगर, नक्खी घाट, अमरपुर, सराय रोड, कोहना, सिंधवा घाट, अलईपुर समेत अनेक कॉलोनियों में पानी भरा हुआ है।



जलस्तर बढ़ने से गंगा घाटों का आपसी संपर्क टूटा हुआ है। गंगा नदी किनारे स्थित कई मंदिर पानी में डूब गए हैं। ऐतिहासिक दशाश्वमेध, असि एवं मणिकर्णिका समेत अधिकांश घाटों की ऊपरी सीढ़ियों तक गंगा का पानी आ गया है। इस वजह से पूजा-अर्चना के अलावा दाह संस्कार करने में भी परेशानियों का सामना पड़ रहा है। मणिकर्णिका एवं हरिश्चंद्र घाट पर शवों के दाह संस्कार करने में दिक्कतें आ रहीं हैं।

दशाश्वमेध घाट पर शाम को होने वाली विश्वप्रसिद्ध गांगा आरती का स्थान बदल दिया गया है। अब यहां घाट के ऊपरी हिस्से पर गंगा आरती आयोजित की जाती है। असि घाट पर “सुबह-ए-बनारस” कार्यक्रम स्थल तक पानी पहुंच गया है।

अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि बाढ़ की आशंका के मद्देनजर जिला प्रशासन की ओर से समुचित तैयारियां की गई हैं। पीड़ितों की मदद के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित किये गए हैं। लोग टेलीफोन फोन नंबर 0542-2502562 (जिला मुख्यालय), 0542-2225461 रूम बंधी प्रखंड, 0542-2281018 (सदर तहसील), 0542-2627011 (पिंडरा तहसील) और 0542-2632019 (राजातालाब तहसील) पर फोन कर मदद ले सकते हैं।

उन्होंने बताया कि 32 बाढ़ चौकियां को सक्रिय हैं। आपात स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ के गोताखोर संवेदनशील स्थानों पर तैनात हैं तथा 524 नावें, एक जेसीबी, 33 ट्रैक्टर और छह क्रेनों की व्यवस्था की गई हैं।



उल्लेखनीय है कि वर्ष 1978 में अधिकतम जलस्तर 73.90 मीटर दर्ज किया गया था, जब वाराणसी का बड़ा हिस्सा बाढ़ की चपेट में आ गया था।

बीरेंद्र सोनिया

वार्ता

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