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राज्य


डा.सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ के किसान और जनता इस पहल को देख रही है कि किसानों से जुड़े मुद्दे को लेकर दो दिन का विशेष सत्र बुलाया गया है। आम आदमी विधानसभा को जानता नहीं लेकिन ये समझ गया कि 2400 करोड़ रुपये भी देना है तो विधानसभा का रास्ता ही तय करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि त्यौहार का वर्ष चल रहा है। प्राचीन कथा भी है कि माता पार्वती ने आज के दिन 12 वर्ष कठिन उपवास किया था। उन्होंने कहा कि सत्र का समापन हो गया था। विदाई कार्यक्रम में कई सदस्य भावुक हो गए थे। कइयों के आंसू निकल आये थे। आज जब दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया तो विपक्ष के सदस्यों के अंदर की पीड़ा निकल रही है।
डा.सिंह ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने भी देर रात सुनवाई कर नई परिपाटी शुरू की थी। इसी तरह किसानों के लिए बुलाया गया ये विशेष सत्र नई परिपाटी की तरह है। इस मानसिकता से ऊपर उठना होगा कि गम्भीर मुद्दों को लेकर ही विशेष सत्र बुलाया जाएगा। लोकहित से जुड़े मुद्दों को लेकर भी विशेष सत्र बुलाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि ये आरोप लगाया गया कि सरकार की वित्तीय स्थिति बिगड़ गई है। राजस्व घाटा 2003-2004 में 341 करोड़ थ। आज 2017- 2018 में 3 हजार 4 सौ करोड़ का राजस्व आधिक्य है। 2017-18 में देश का टेक्स और जीडीपी का अनुपात 12 फीसदी है। जबकि छत्तीसगढ़ का 19 फीसदी है। राज्य का ऋण भार 2018 के प्रतिवेदन के हिसाब से 17.4 फीसदी है जबकि अन्य राज्यों का औसत 24.3 फीसदी है।
सुरेंद्र.साहू
जारी.वार्ता
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