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श्री कुमार ने निर्देश दिया कि विधि-व्यवस्था और जांच को अलग करने का प्रावधान सुनिश्चित कर इसे अविलंब लागू किया जाये। राज्य सरकार का यह संवैधानिक दायित्व है कि वह कानून के राज को कायम रखे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 में जनता दरबार कार्यक्रम के बाद वर्ष 2016 में लोक शिकायत निवारण अधिकार कानून लागू किया गया, जिसमें यह देखा गया कि बिहार में 60 प्रतिशत से अधिक भूमि विवाद से जुड़े मामले हैं। ऐसे विवादों का समाधान हर हाल में सुनिश्चित करना होगा। खुफिया काम में लगे लोगों द्वारा सही जानकारी दिए जाने पर उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा तो इससे अन्य लोग भी प्रेरित होंगे और अच्छा काम करेंगे। उन्होंने कहा कि तकनीक का दुरुपयोग कर वाहनों के फर्जी कागजात बनाने वाले गिरोह को चिन्हित कर उनपर पुलिस प्रशासन सख्त कार्रवाई करे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि साम्प्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने वाली घटनाओं का विश्लेषण किया जाये। आखिर क्या कारण है कि जिन स्थानों पर पहले ऐसी घटनाएं हुआ करती थी वहां इसमें काफी कमी आई और नये स्थानों पर इस तरह की घटनाएं हो रही है। जो संवेदनशील इलाके हैं, उस पर विशेष तौर पर निगरानी बनाये रखने की जरुरत है। ऐसे स्थानों का जिला अधिकारी और पुलिस अधीक्षक को दौरा कर शान्ति समिति के लोगों के साथ बातचीत करनी चाहिए।
श्री कुमार ने कहा कि दशहरा और मुहर्रम त्योहार को ध्यान में रखते हुये अभी से ही क्षेत्रीय अधिकारियों को अलर्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने मुख्य सचिव, गृह विभाग के प्रधान सचिव और पुलिस महानिदेशक को सभी जिलाधिकारियों से इस संबंध में बातचीत करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक तनाव फैलाने वाले मामलों का त्वरित ट्रायल कराकर दोषियों को सजा दिलाने की दिशा में तेजी से काम करने की आवश्यकता है। इससे कोई समझौता नहीं होना चाहिए चाहे वह कोई भी क्यों न हो।
सूरज उपाध्याय रमेश
जारी (वार्ता)
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