Friday, Sep 21 2018 | Time 18:57 Hrs(IST)
image
BREAKING NEWS:
  • तेलंगाना में आप सभी 119 सीटों पर लड़ेगी चुनाव: भारती
  • अब जियो टीवी पर देख सकेंगे क्रिकेट मैच
  • हुड्डा ने की बीएसएफ जवान के परिवार को सहायता देने की मांग
  • दीपावली पर दस हजार परिवारों के घर का सपना होगा पूरा
  • भारत-श्रीलंका महिला टीमों का दूसरा मैच धुला
  • बिहार के किसानों को अब फीडर से मिलेगी बिजली
  • जीप एवं मिनी ट्रक टकराने से सात लोगों की मौत-आठ घायल
  • निलम्बन के खिलाफ दलाल जाएंगे अदालत, राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग
  • एनएसई का लंदन स्टाॅक एक्सचेंज से करार
  • नहीं किया ट्रंप के साथ बैठक का आग्रह: ईरान
  • केजरीवाल ने शहीद के परिजनों को आर्थिक सहायता देने का दिया आश्वासन
  • सचिन ने दी लिट लेने से किया इंकार
  • सचिन ने दी लिट लेने से किया इंकार
  • तमाम उपलब्धियों के साथ तीन देशों की यात्रा से लौटे वेंकैया
  • भारत-पाकिस्तान वार्ता का कोई मतलब नहीं : कांग्रेस
राज्य » उत्तर प्रदेश Share

राजनीति शर्मा राफेल दो लखनऊ

श्री शर्मा ने कहा कि कांग्रेस की संप्रग सरकार के दौरान 12 दिसम्बर 2012 को 126 राफेल लडाकू विमान का सौदा हुआ था। प्रत्येक जहाज की कीमत 526़ 10 करोड रूपये थी। समझौते के तहत 18 लडाकू विमान फ्रांस से बनकर आने थे और 108 जहाज ट्रांसफर आफ टेक्नोलाजी के तहत एचएएल को बनाने थे। इस कीमत पर 36 विमानों की कीमत 18490 करोड रूपये आती।
उन्होने कहा कि श्री मोदी ने 10 अप्रैल 2015 को पेरिस में 7़ 5 बिलियन यूरो यानी 60 हजार 145 करोड रूपये में 36 राफेल लडाकू विमान की ‘आफ द शेल्फ’ इमरजेंसी खरीद की घोषणा कर डाली। इसकी पुष्टि विमान निर्माता कंपनी डसाल्ट एवियेशन ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2016 में की है। श्री मोदी को देश को बताना चाहिये कि सरकारी खजाने से 41 हजार 205 करोड रूपये ज्यादा क्यों खर्च किये।
श्री शर्मा ने कहा कि 36 राफेल लडाकू जहाजों की खरीद की एकतरफा घोषणा के बाद एचएएल को दरकिनार कर दिया गया। इसका लाभ प्रधानमंत्री के पूंजीपति मित्रों को हुआ। 30 हजार करोड का आफसेट कांट्रैक्ट रिलायंस डिफेंस लिमिटेड को मिल गया। इसके अलावा एक लाख करोड रूपये का लाइफ साइकिल कास्ट कांट्रैक्ट रिलांयस इंफ्रा को मिला। दिलचस्प है कि इन कंपिनयों का गठन श्री मोदी के फ्रांस दौरे के महज 12 दिन पहले यानी 28 मार्च 2015 को हुआ था।
इस बारे में कांग्रेस ने जब मामला उठाया तो प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री ने गोपनीयता की शर्त का हवाला देते हुये 36 राफेल विमानों का खरीद मूल्य संसद को बताने से इंकार कर दिया। उन्होने सवाल किया कि श्री मोदी को साफ करना चाहिये कि उन्होंने वायुसेना के लिये जरूरी 126 लडाकू जहाजों की संख्या घटाकर 36 क्यों कर दी। समझौते के तहत पहला विमान 2019 को आयेगा और आखिरी विमान 2022 को मिलेगा। इस लिहाज से इसे इमरजेंसी खरीद कैसे जायज ठहराया जा सकता है।
कांग्रेसी सांसद ने आरोप लगाया कि 36 लडाकू जहाज खरीदने का एलान करते समय जरूरी कैबिनेट कमेटी आन सिक्योरिटी की पूर्व अनुमति नही ली गयी। डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसीजर की धज्जियां उडा दी गयी यानी कांट्रैक्ट नेगोसियेशन कमेटी (सीएनसी) और प्राइन नेगोसियेशन कमेटी (पीएनसी) द्वारा सही कीमत पता करने की प्रक्रिया को पूर्णयता दरकिनार कर दिया।
प्रदीप तेज
जारी वार्ता
image