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उत्तर प्रदेश नाईक जांच दो अंतिम मथुरा

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष प्रो0 धीरेन्द्र पाल सिंह ने दीक्षांत भाषण देते हुए कहा कि पशु चिकित्सकों के माध्यम से किसानों की आय दो गुनी करने के राष्ट्रीय संकल्प की पूर्ति की जा सकती है। उन्होंने कहा कि उचित पशु पोषण, पशु प्रबंधन, पशु रोग के निदान एवं कृत्रिम गर्भाधान जैसी तकनीकों के अधिकतम उपयोग, मादा पशु के ऋतु चक्र एवं बांझपन को नियंत्रित कर तथा पशु चिकित्सा सेवाओं को प्रभावी बनाकर प्रति इकाई दूध, मांस एवं अंडे का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि पशु उत्पादों के विपणन तंत्र को प्रभावी बनाकर, आर्गेनिक कृषि का व्यवसायीकरण कर, पशु उत्पादों का गुणवत्तावर्धन कर, बिचैलियों को हटाकर, ग्रामीण युवा एवं महिलाओं की भागीदारी बढ़ाकर,देशी नस्लों का संवर्धन कर, पशु पालन को मत्स्य पालन से एकीकृत कर, कोआपरेटिव समितियों की स्थापना कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भारी परिवर्तन किया जा सकता है और इस कार्य में पशु चिकित्सक महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है।
उन्होंने कहा कि देशी पशुओं में रोग प्रतिरोधकता अधिक होने, दूध की गुणवत्ता बेहतर होने एवं जलवायु तथा पर्यावरण परिवर्तन का अधिक प्रभाव न पड़ने के कारण इनके संवर्धन के लिए योजनाएं लागू करना उचित होगा। इस कार्य में पशु चिकित्सक की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
प्रदेश के पशुधन, लघु सिंचाई एवं मत्स्य विभाग मंत्री प्रो0 एस0पी0 सिंह बघेल ने जहां उपाधिधारकों से उपयुक्त एवं वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन करने के लिए किसानों को प्रेरित करने का आह्वान किया वहीं पशु वैज्ञानिकों से कमजोर एवं लघु सीमांत कृषकों के लिए ऐसी उत्पादन तकनीक व पैकेज विकसित करने पर बल दिया जो औचित्यपूर्ण, पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित और सामाजिक दृष्टि से इतनी व्यवहारिक हो कि जिसे अपनाकर किसान अपनी आय दुगनी कर सकें। उनका कहना था कि वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन करने के कारण ही पंजाब और हरियाणा के किसान खुशहाल है और वहां का किसान आत्महत्या नही करता है।
इस अवसर पर 93 विद्यार्थियों को जहां विभिन्न क्षेत्रों में उपाधियां दी गईं वहीं 14 लोगों को पीएचडी की उपाधि से अलंकृत किया गया।
सं तेज
वार्ता
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