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पुराने मुकदमों का एक वर्ष में हो निस्तारण:भोसले

कन्नौज, 01 सितम्बर (वार्ता) इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति दिलीप बाबासाहेब भोसले ने कहा कि प्रदेश की विभिन्न अदालतों में वर्ष 2000 से पहले के चल रहे सिविल और फौजदारी के मामलों को एक वर्ष के अंदर
निस्तारित करने लक्ष्य रखा गया है और इसके लिए अधिवक्ताओं से सहयोग मांगा।
न्यायमूर्ति भोसले ने कन्नौज में शनिवार को यहां नवनिर्मित अधिवक्ता सदन का उद्घाटन किया। इस मौके पर
उन्होंने प्रदेश की अदालताें में विचाराधीन पुराने मुकदमों का निस्तारण समय से न हो पाने पर चिंता जताते हुए उनके निपटारे के लिए अधिवक्ताओं से सहयोग मांगा है। उन्होंने कहा कि न्यायालयों पर मुकदमों के बोझ को कम करने
के लिए वर्ष 2000 से पूर्व के सभी मामलों को एक वर्ष के भीतर निस्तारित करने का लक्ष्य रखा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी न्यायालयों को आॅनलाइन किया जा रहा है। उच्च न्यायालय इलाहाबाद की वेवसाइट के माध्यम से अधिवक्ताओं को मुकदमों की सूचनाऐं ई-मेल और एसएमएस के जरिए भेजी जा रही है। इस व्यवस्था के लागू होने से प्रत्येक वर्ष करीब 3.25 करोड़ राजस्व की बचत हो रही है।
न्यायमूर्ति भोसले ने कहा कि इस व्यवस्था को उत्तर प्रदेश के प्रत्येक न्यायालय में लागू करने की तैयारी की
जा रही है। सभी जिलों में ई-लाइब्रेरी बनाने की योजना को अन्तिम स्वरूप दिया जा रहा है और शीघ्र ही सभी जिलो में ई-लाइब्रेरी बना दी जाएगी।
चीफ जस्टिस ने कहा कि बार और बेंच की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। न्याय के लिए पूरा समाज हमारी ओर देख रहा है। यदि हम गलत साबित होगें तो न्यायिक प्रक्रिया पर बड़ा सवाल लग जाएगा।
उद्घाटन समारोह को उच्च न्यायालय की अवस्थापना समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ एवं प्रशासनिक
न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने भी सम्बोधित किया। इसके बाद मुख्य न्यायमूर्ति समेत न्यायिक अधिकारियों ने
न्यायालय परिसर में पंचशील पौधा रोपकर प्रदेश को हरा-भरा बनाने का संदेश दिया। समारोह में जिला जज
बाबूलाल केसरवानी, जिलाधिकारी रवीन्द्र कुमार, पुलिस अधीक्षक अमरेन्द्र सिंह समेत न्यायिक अधिकारी और
अधिवक्तागण मौजूद थे।
सं त्यागी तेज
वार्ता
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