Saturday, Sep 22 2018 | Time 11:38 Hrs(IST)
image
BREAKING NEWS:
  • खलनायकी को नया आयाम दिया प्रेम चोपड़ा ने
  • सुरक्षाबलों ने कुपवाड़ा में घुसपैठ की कोशिश विफल की
  • पुलवामा में सुरक्षाबलों का व्यापक तलाश अभियान
  • चीन की नजर परमाणु ऊर्जा के अंतरराष्ट्रीय बाजार पर
  • ब्राजील की अदालत ने ट्विटर को दिया डाटा सौंपने का आदेश
  • पितृपक्ष मेला को लेकर प्रशासनिक तैयारियां पूरी
  • ट्रेन से कटकर दंपति की मौत
  • चीन ने कैरेबियाई देश डोमिनिकन रिपब्लिक में खोला दूतावास
  • मैक्सिको में पत्रकार की हत्या
  • मोदी ने चामलिंग को दी जन्मदिन की बधाई
  • नाफ्टा वार्ता विफल होने पर मैक्सिको कनाडा से करेगा समझौता : ओब्राडोर
  • ट्रम्प प्रशासन अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा पर खतरा : ईरान
  • इजरायल सेना की गोलीबारी में फिलीस्तीनी की मौत
  • वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका करेगा कार्रवाई : पोम्पेओ
  • न्यूयॉर्क में तीन नवजात बच्चों,दो लोगों पर चाकू से हमला
राज्य » उत्तर प्रदेश Share

उत्तर प्रदेश-नाईक एसजीपीजीआई दो अंतिम लखनऊ

राज्यपाल ने पूर्व प्रधानमंत्री स्व0 अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये कहा कि देश एवं विशेषकर लखनऊ के विकास में अटल जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनका हिमालय जैसा व्यक्तित्व और समुद्र जैसा गहरा ज्ञान आज भी सबको प्रेरित करता है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को अपनी-अपनी उपाधियाँ संभालकर रखने की भी सलाह दी। उन्होंने बताया कि कई वर्ष पहले सूचना के अधिकार के तहत श्री वाजपेयी की उपाधि के बारे में डीएवी कालेज कानपुर से जानकारी मांगी गयी। डीएवी कालेज ने कानपुर विश्वविद्यालय को प्रकरण प्रेषित किया और कानपुर विश्वविद्यालय ने कहा कि आगरा विश्वविद्यालय से सूचना प्राप्त की जाये। आगरा विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति ने कहा कि इसका कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं है। आगरा विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति से मैंने फोन पर बातचीत की तथा पुराना रिकार्ड निकलवाया जिसके अनुसार 1947 में अटल जी ने डीएवी कालेज से राजनीति शास्त्र से एम0ए0 किया था। उन्होंने कहा कि आज के उपाधि धारक कल किसी ऊंचे स्थान पर जा सकते हैं इसलिये अपनी उपाधि को संभाल कर रखें।
इस मौके पर समारोह के मुख्य अतिथि एवं नीति अायोग के सदस्य डाॅ0 विनोद पाॅल ने कहा कि पीजीआई भारत और विशेषकर उत्तर प्रदेश के लिए एक रत्न है। यहाँ से निकलने वाले छात्रों को गर्व होना चाहिए। चुनौतियों का सामना करने के लिए बड़े सपने देखें। शार्टकट से सफलता नहीं मिलती। उत्कृष्टता को अपनी आदत बनायें। उन्होंने उपाधि धारकों को सलाह दी कि संकाय की कमी देखते हुये शैक्षिक क्षेत्र में योगदान दें। विशेषज्ञों की कमी को पूरा करें। आत्मिक संतोष के बारे में सोचें। हर चीज केवल पैसा नहीं होती, इसलिये समाज के भरोसे को टूटने न दें। उन्होंने कहा कि स्वयं में बिना मानवीय गुण के किसी भी डिग्री का कोई अर्थ नहीं है।
दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टण्डन ने कहा कि यह संस्थान प्रदेश का गौरवशाली संस्थान है। जनसामान्य को संस्थान पर बहुत विश्वास है। सीमित संसाधन के कारण रोगियों को दिक्कतें भी होती हैं। सरकार स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील है और शीघ्र ही संस्थान को वृहद् रूप दिया जायेगा। उन्होंने संस्थान के पदाधिकारियो को आश्वस्त किया कि संस्थान में संसाधनों की कमी नहीं होने दी जायेगी। उन्होंने उपाधि धारकों को शुभकामनाएं देते हुये कहा कि लोगों की आशाओं पर खरा उतरने का प्रयास करें। सेवा भाव जाग्रत रखें तथा ग्रामीण क्षेत्र में भी अपनी सेवायें दें।
23वें दीक्षान्त समारोह में कुल 162 छात्र-छात्राओं को उपाधियाँ प्रदान की। उपाधियों में 37 उपाधि डी0एम0, 16 उपाधि एम0सी0एच0, 19 उपाधि एम0डी0, 7 उपाधि एम0एच0ए0, 44 उपाधि पी0डी0सी0सी0,4 उपाधि पी0एच0डी0 तथा 35 बी0एस0सी0 नर्सिंग की उपाधियाँ सम्मिलित हैं। उत्कृष्ट शोध के लिए छात्र को प्रदान किया जाने वाला प्रतिष्ठित ‘प्रो0 एस एस अग्रवाल अवार्ड’ न्यूरोलाॅजी विभाग के डाॅ0 विजय कुमार को तथा उत्कृष्ट शोध के लिए संकाय सदस्य को प्रदान किया जाने वाला ‘प्रो0 एस0आर0 नायक अवार्ड’ पीडियार्टिक गैस्ट्रो के विभागाध्यक्ष प्रो0 एस0के0 याचा को दिया गया।
डी0एम0 एवं एम0सी0एच0 छात्रों को प्रदान किया जाने वाला ‘प्रो0 आर0के0 शर्मा अवार्ड’ इम्यूनोलाॅजी विभाग के डाॅ0 विकास गुप्ता को दिया गया।
इस मौके पर संस्थान के निदेशक प्रो0 राकेश कपूर ने संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के साथ उपलब्धियों का भी ब्यौरा दिया। धन्यवाद प्रस्ताव संकाय अध्यक्ष प्रो0 राजन सक्सेना द्वारा ज्ञापित किया गया।
त्यागी तेज
वार्ता
image