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चुनावों में सुधार के लिए खर्च आयोग के हाथ में हो :हरगोविंद

झांसी, 01 सितम्बर (वार्ता) उत्तर प्रदेश के राज्यमंत्री हरगोविंद कुशवाहा ने चुनाव में सुधार के लिए चुनाव खर्च का हिसाब चुनाव आयोग के हाथ में होने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
जिला अधिवक्ता सभागार में शनिवार को यहां यूपी इलेक्शन वॉच (एडीआर) द्वारा चुनाव सुधार के लिए आयोजित अधिवक्ता संवाद को सम्बाेधित करते हुए श्री कुशवाहा ने कहा कि स्वच्छ एवं ईमानदार छवि के उम्मीदवारों को चुनाव लड़ाने के लिये चुनाव आयोग को खर्चे की जिम्मेदारी अपने हाथों में लेनी चाहिये। यहीं नहीं इसके लिए सरकार द्वारा कानून बनाकर मुख्य चुनाव आयुक्त को यह अधिकार सुनिश्चित कराना चाहिये तभी चुनाव सुधार की वास्तविक छवि निखरकर सामने आयेगी।
उन्होंने कहा कि संविधान को ध्यान में रखते हुये भारत के प्रत्येक नागरिक को चुनाव लडऩे का अधिकार है। इसके लिए ईमानदार एवं स्वच्छ छवि के उम्मीदवार तभी आगे आ सकेंगे जब चुनाव आयोग खर्चे की सीमा तय करते हुये स्वयं के पैसे से उम्मीदवार को चुनाव लड़ाये। वर्तमान में नियमों को ताख पर रखकर उम्मीदवार खर्च की सीमा को पार करते हुये ब्यौरा निर्धारित खर्च सीमा के नीचे ही देते हैं। चुनाव सुधार के लिए पेड न्यूज पर भी पूर्णतः प्रतिबंध होना चाहिये।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये जिला बार संघ के अध्यक्ष अधिवक्ता उदय राजपूत ने कहा कि करोड़ों खर्च कर अच्छे और ईमानदार छवि के लोग कभी चुनाव नहीं लड़ सकते और जो करोड़ों खर्च करते है उनमें जनता की सेवा का भाव नहीं होता। वह केवल अपने वर्चस्व को कायम रखने के लिए विधायक व सांसद बनते है। बार संघ के महामंत्री अधिवक्ता के.पी.श्रीवास्तव ने जातीय मुद्दे को दरकिनार कर मतदान करने का सुझाव दिया।
भारतीय गौ क्रान्ति मंच के राष्ट्रीय प्रमुख प्रचारक कुंवर रामपाल सिंह निरंजन ने कहा कि सांसद और विधायक के वेतन भत्तों तथा निधियों की निगरानी के लिए मतदाताओं की निगरानी समिति बनना चाहिये। यूपी इलेक्शन वॉच (एडीआर)के प्रदेश समन्वयक अनिल शर्मा ने कार्यक्रम की भूमिका प्रस्तुत करते हुये जनप्रतिनिधियों के वेतन भत्ते उनकी पेंशन और मतदाताओं के अधिकारों पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मतदाता अपने सेवकों के खर्चों और अधिकारों के बारे में नहीं जानता तो वह उनसे सेवा कैसे करवायेगा। उन्होंने मतदाताओं से मांग पत्र बनाने और जनप्रतिनिधियों की पेंशन बंद कराने के प्रस्ताव पारित कराये।
सोनिया मुसन्ना
वार्ता
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